मंदसौर जिले के सेमलिया हीरा गांव के शासकीय स्कूल में गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) और उसके अगले दिन (27 जनवरी) की तस्वीरों में जमीन-आसमान का अंतर देखने को मिला। 26 जनवरी को जब कलेक्टर और विधायक स्कूल पहुंचे, तो बच्चों को सफेद कालीन पर बैठाकर 6 तरह के व्यंजन परोसे गए। लेकिन 27 जनवरी को वीआईपी के जाते ही ‘शाही’ व्यवस्था नदारद हो गई। बच्चे फटी टाट-पट्टी पर बैठकर मिड-डे मील खाते नजर आए और थाली में व्यंजनों की संख्या भी आधी रह गई। 26 को ‘शाही’ थाली, 27 को ‘सरकारी’ हकीकत गणतंत्र दिवस पर कलेक्टर आदित्य गर्ग और विधायक विपिन जैन की मौजूदगी में बच्चों को स्कूल की बड़ी बिल्डिंग में बैठाया गया था। जमीन पर सफेद कालीन बिछी थी। खाने में पूरी, खीर, पकौड़ी, मोतीचूर के लड्डू, मिक्स वेज और चवले की दाल परोसी गई थी। वहीं, अगले ही दिन (27 जनवरी) बच्चे माध्यमिक शिक्षा मंडल की दूसरी बिल्डिंग में फटी हुई टाट-पट्टी पर बैठकर खाना खाते दिखे। मेनू सिमटकर सिर्फ पूरी, आलू की सब्जी और खीर पर रह गया। बच्चे बोले- कल का खाना ज्यादा अच्छा था भास्कर ने जब बच्चों से बात की, तो उनकी मासूमियत ने सच बयां कर दिया। प्रबंधन बोला- कल पंचायत ने दिया था खाना प्रभारी प्राचार्य भेरूलाल अमरोदिया ने सफाई देते हुए कहा कि 26 जनवरी का भोजन ग्राम पंचायत द्वारा उपलब्ध कराया गया था, इसलिए विशेष इंतजाम और कालीन थे। जबकि 27 जनवरी का भोजन शासन की मध्याह्न भोजन योजना के तहत है, जो रोज की तरह टाट-पट्टी पर बैठाकर खिलाया गया। शौचालय के पास पी रहे पानी, प्यूरीफायर नहीं खाने से भी ज्यादा गंभीर लापरवाही पानी को लेकर सामने आई। बच्चे जिस नल से पानी पीते हैं, उसके ठीक ऊपर दीवार पर ‘महिला शौचालय आंगनबाड़ी’ लिखा है। जहां बच्चे पानी पीते हैं, वहीं पास में महिलाएं बर्तन धोती नजर आईं। स्कूल में वॉटर प्यूरीफायर नहीं है। शिक्षक चरणजीत पवार ने तर्क दिया कि पूरा गांव इसी टंकी का पानी पीता है। प्यूरीफायर की मांग पर उन्होंने कहा कि “यह मेरे अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।”


