‘कैसा कानून ला रही है ये सरकार, गलत है ये… मेरा भाई 1857 की क्रांति से प्रेरित है। यूजीसी के नए एक्ट से मेरा भाई बहुत आहत है। जातिवाद में देश तो पहले से ही बंटा हुआ है। ऊपर से मेडिकल, इंजीनियरिंग कॉलेज सभी जगह बच्चों में यह खाई पैदा करने का काम करेगा… इस कानून के लागू होने से समाज में भाईचारा खत्म हो जाएगा।’ यह कहना है उस पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री के चचेरे भाई राजेश अग्निहोत्री का, जिन्होंने गणतंत्र दिवस वाले दिन बरेली में अपने सिटी मजिस्ट्रेट के पद से इस्तीफा का ऐलान कर दिया। बाकायदा अपने सरकारी आवास के बाहर यूजीसी के नए एक्ट के विरोध में हाथों से लिखा बैनर लहराया और अपने दफ्तर में अपने नाम के आगे अंग्रेजी में ‘रिजाइन’ लिख दिया। अपने इस्तीफा से चर्चा में आए अलंकार अग्निहोत्री मूल रूप से कानपुर के रहने वाले हैं। यहां केशव नगर में उनका मकान है। बजरंग बली निवास के रहने वाले अलंकार अग्निहोत्री का परिवार इसी मकान में रहता है। दैनिक भास्कर ने उनके घर पहुंचकर उनके परिवार के लोगों से बात की। उनके ताऊ रि. विंग कमांडर एसके अग्निहोत्री और चचेरे भाई राजेश अग्निहोत्री ने प्रयागराज में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के हुई पुलिस बर्बरता व UGC कानून के विरोध में इस्तीफा देने पर खुलकर अपना पक्ष रखा। उनसे क्या बात हुई पढ़िए पूरी रिपोर्ट… पहले यह 2 तस्वीर देखिए… भाई का सवाल- कैसा कानून ला रही सरकार ? अलंकार अग्निहोत्री के चचेरे भाई राजेश अग्निहोत्री ने बताया कि वह (अलंकार) बहुत प्रतिभाशाली है। संवेदनशील है। उसका कोई फैसला गलत नहीं होता है। यूजीसी के नए एक्ट से वह आहत थे, इसलिए उन्होंने नौकरी को छोड़ने का फैसला किया।
राजेश अग्निहोत्री ने कहा कि दो महीने पहले उनकी अलंकार से बात हुई थी। फोन पर बातचीत के दौरान अलंकार केंद्र सरकार के UGC कानून को लेकर चिंता व्यक्त की थी। राजेश ने बताया कि इस कानून को लेकर वह बहुत आहत थे, मेरे भाई का कितना उत्पीड़न हो रहा होगा, जो उन्होंने इस तरह का कदम उठाया। उन्होंने कहा आखिर सरकार कैसा कानून लेकर आई है, जिससे भेदभाव बढ़ता हो। छात्रों को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा कर दे। प्रयागराज में जो घटना हुई वो कितनी ही शर्मनाक है, छोटे–छोटे बटुकों की शिखा पकड़ कर घसीट–घसीट कर पीटा गया। सिखों की पगड़ी छूकर देखिए, पता लग जाएगा राजेश आगे कहते हैं, हमारे सिख भाई हैं, उनकी पगड़ी को छूकर देख लीजिए… पता लग जाएगा। कपूरथला में इस तरीके की घटना हो चुकी है। मुस्लिम भाईयों की दाढ़ी छूकर देख लीजिए… कैसा लगेगा। इस घटना के बाद पूरे सवर्ण समाज को एकजुट होना चाहिए। हमारा भाई (अलंकार) 1857 की लड़ाई से प्रेरित है, मंगल पांडेय ने जो कदम उठाया था, वही मेरे भाई ने उठाया है। मेरा भाई इस समय बहुत परेशान है, उससे बात नहीं हो पा रही है। हमारे ताऊ विंग कमांडर एसके अग्निहोत्री से अलंकार की पत्नी आस्था से बात हुई थी, जो घबराई हुई हैं। हालांकि हमारा पूरा परिवार अलंकार के इस फैसले में उनके साथ खड़ा हुआ है। अब जानिए अलंकार की शिक्षा के बारे में… राजेश अग्निहोत्री ने बताया कि अलंकार शुरू से ही मेधावी रहे हैं। उन्होंने किदवई नगर स्थित राष्ट्रीया विद्यालय से हाईस्कूल और इंटर में यूपी टॉप किया था। IIT BHU से बीटेक किया, फिर एलएलबी किया। 10 साल तक बैंगलोर स्थित आईटी सेक्टर की मल्टीनेशनल कंपनी में काम किया। फ्लाइट से देश-विदेश की यात्रा के दौरान वह परिवार को समय नहीं दे पाते थे, इसलिए उन्होंने वह नौकरी छोड़ दी। अलंकार शुरू से ही समाज के हित में काम करना चाहते थे, जिस कारण उन्होंने सिविल सर्विसेज की तैयारी शुरू की। इस परीक्षा के पहले ही प्रयास में वह कामयाब भी हुए। PCS में हासिल की थी 15वीं रैंक अलंकार अग्निहोत्री ने 2019 में PCS में 15वीं रैंक हासिल की, जिस कारण उन्हें जल्द ही UP कैडर मिल गया। उनके पिता विजय कुमार अग्निहोत्री बैंक में क्लर्क थे। जब अलंकार 10 साल के थे, तब उनके पिता का निधन हो गया था। उनकी जगह पर मां गीता को नौकरी मिली। मां ने बच्चों की पढ़ाई के लिए काफी संघर्ष किया। बच्चों को खूब पढ़ाया। अलंकार अपने पांच भाई-बहनों में सबसे बड़े हैं। अलंकार के साथ ही उनके भाई राहुल अग्निहोत्री, शशांक, अंकित व बहन दीपिका अग्निहोत्री ने बीटेक किया है। सभी भाई मल्टीनेशनल कंपनी में अच्छे पद पर हैं। लखनऊ, उन्नाव और बलरामपुर में एसडीएम रहे अलंकार अग्निहोत्री बरेली से पहले वह बलरामपुर, उन्नाव और लखनऊ में एसडीएम पद पर तैनात रह चुके हैं। वह प्रशासनिक क्षेत्र में अपनी स्पष्टवादिता और सख्त कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं। 10 साल आईटी सेक्टर में कर चुके हैं नौकरी अलंकार अग्निहोत्री मई, 2025 में बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट पद पर तैनात हुए थे। इससे पहले वह लखनऊ में सहायक नगर आयुक्त थे। पहले ही प्रयास में पीसीएस परीक्षा पास की थी। सरकारी नौकरी की तैयारी से पहले उन्होंने 10 साल तक आईटी सेक्टर में कंसल्टेंसी की नौकरी की थी। उन्होंने 1998 में यूपी बोर्ड की परीक्षा में प्रदेश भर में 21वीं स्थान पाया था। इसके बाद बीएचयू से बीटेक किया। अलंकार से जुड़े पुराने विवाद- भीम आर्मी ने हनुमानजी की तस्वीर पर हंगामा किया था पीसीएस अफसर अलंकार इससे पहले भी विवादों में आ चुके हैं। उन्होंने अपने दफ्तर में बजरंगबली की तस्वीर लगा रखी थी। इस बात को लेकर भीम आर्मी के पदाधिकारियों ने हंगामा किया था। बरेली सिटी मजिस्ट्रेट के कार्यालय में कार्यकर्ताओं ने देखा कि वहां भारत रत्न बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की फोटो नहीं थी, बल्कि हनुमान जी की तस्वीर लगी हुई थी। इसी बात पर कार्यकर्ता नाराज हो गए और हंगामा करने लगे। सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री से उनकी बहस हो गई। सिटी मजिस्ट्रेट पर गंभीर आरोप लगाए थे भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि सिटी मजिस्ट्रेट ने कहा, वह बाबा साहब अंबेडकर को नहीं मानते, बल्कि हनुमान जी को मानते हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह बाबा साहब का अपमान है। उन्होंने आरोप लगाया कि मजिस्ट्रेट ब्राह्मण समुदाय से हैं और संविधान निर्माता का अपमान कर रहे हैं, जबकि बाबा साहब ने हमें अधिकार दिलाए हैं। इतना ही नहीं यह भी आरोप लगाया कि सिटी मजिस्ट्रेट ने कार्यकर्ताओं से कहा, यह मेरा निजी कार्यालय है। यहां जिसकी फोटो मैं लगाऊं। इससे किसी को क्या लेना देना? साथ ही उन्होंने परमिशन भी नहीं दी। इनका साफ-साफ संदेश है कि आजाद समाज पार्टी को किसी भी कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी जाएगी। कार्यकर्ताओं ने कहा, आप किसी की भी फोटो लगाइए, हम कोई दिक्कत नहीं है। आप अपनी फोटो किसी भगवान की फोटो लगाइए। लेकिन जो कानून में है। किसी स्वतंत्रता सेनानी, बाबा साहब की फोटो लगाना अनिवार्य है। तो उनकी भी फोटो लगाइए।


