UGC कानून के विरोध में1फरवरी को भारत बंद का आह्वान:वक्ता बोले-काला कानून वापस हो; तिलक, तराजू और तलवार अब अन्याय को और सहन नहीं करेंगे

UGC कानून के विरोध में जोधपुर स्थित एक होटल में एक प्रेस वार्ता आयोजित की गई, जिसमें सवर्ण समाज के पदाधिकारियों ने भाग लिया। प्रेस वार्ता में वक्ताओं ने कहा कि यदि यह काला कानून वापस नहीं लिया गया तो आगामी 1 फरवरी को भारत बंद किया किया जाएगा। वक्ताओं ने बताया कि इस आंदोलन को लेकर व्यापारिक संगठनों से बातचीत हो चुकी है और उन्होंने पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया है। इसके साथ ही 36 कौमों के लोग इस आंदोलन से जुड़कर इसे सफल बनाएंगे। ब्राह्मण महासभा प्रदेश उपाध्यक्ष कन्हैयालाल पारीक ने बताया कि यूजीसी के अंतर्गत हाल ही में कुछ ऐसे प्रावधानों में बदलाव किए गए हैं, जो समानता के नाम पर लागू किए गए, लेकिन वास्तव में वे समाज को अंदर ही अंदर विभाजित करने का कार्य कर रहे हैं। इन बदलावों से हिंदू समाज को अलग-अलग वर्गों में बाँटने की कोशिश की जा रही है। इसी कारण हम इस काले कानून का विरोध करते हैं और इसके खिलाफ 1 फरवरी को जोधपुर बंद तथा देशव्यापी भारत बंद का आह्वान करते हैं। उन्होंने कहा कि वे सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, सामाजिक संगठनों और समाज के 36 कौम के बंधुओं से अपील करते हैं कि वे इस भारत बंद में सहयोग करें, ताकि हम सब एकजुट रह सकें। कुछ राजनीतिक नेता अपने स्वार्थ के लिए समाज को बाँटना चाहते हैं, जिसे किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने दिया जाएगा। पारीक ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी एक वर्ग का नहीं है। ओबीसी, एससी, एसटी, ब्राह्मण, बनिया, जैन, माहेश्वरी सहित सभी समाजों से आग्रह है कि वे एक साथ आएँ, भाईचारे को मजबूत करें और देश की एकता को बनाए रखें। विभिन्न संगठनों से बातचीत जारी राष्ट्रीय स्तर पर संवाद को लेकर उन्होंने बताया कि विभिन्न संगठनों से बातचीत चल रही है। करणी सेना, ब्राह्मण समाज के बड़े संगठन, माहेश्वरी समाज सहित कई सामाजिक संगठनों से संपर्क में हैं और सभी मिलकर आगे की रणनीति तय कर रहे हैं। ओबीसी वर्ग और 36 कौम के लोग भी इस आंदोलन में शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि विरोध पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा और कानून के दायरे में रहकर किया जाएगा। समाज में जो आक्रोश है, उसे सकारात्मक और लोकतांत्रिक तरीके से व्यक्त किया जाएगा। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले पंचायत चुनावों में मतदान के बहिष्कार जैसे कदम पर भी विचार किया जा सकता है। समाज को बांटने वाला कानून वहीं, ब्राह्मण महासभा के पूर्व जिला अध्यक्ष हस्तीमल सारस्वत ने कहा कि इस काले कानून के खिलाफ़ युवाओं में जो भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है, वह अब सड़कों पर साफ़ दिखाई देने लगा है। पूरे हिंदुस्तान में जिस तरह युवा आंदोलनरत हैं, उससे साफ़ संकेत मिलता है कि सरकार काफी हद तक हिल चुकी है। इससे बड़ा विरोध और क्या हो सकता है कि उत्तर प्रदेश के बरेली से सिटी मजिस्ट्रेट ने भी इस कानून के विरोध में अपने पद से इस्तीफा दे दिया। यह स्थिति इस बात को दर्शाती है कि सभ्य और जागरूक समाज में इस कानून को लेकर कितनी गहरी नाराज़गी है। जिस प्रकार समाज को बांटने का प्रयास किया जा रहा है, वह अत्यंत चिंताजनक है। यदि सरकार ने समय रहते इस पर पुनर्विचार नहीं किया, तो इसका खामियाज़ा सरकार को ही नहीं, बल्कि पूरे देश और जनता को भुगतना पड़ेगा। जनता के हित में और देश को किसी बड़े नुकसान से बचाने के लिए सरकार को चाहिए कि वह जल्द से जल्द अपने निर्णय को वापस ले और इस कानून पर पुनः विचार करे। तिलक, तराजू और तलवार अन्याय और सहन नहीं करेंगे करणी सेना के संभाग प्रभारी मानसिंह मेड़तिया ने कहा कि। हमारे समाज को ऐसे कानूनों के कारण यह महसूस हो रहा है कि मानो हमारे बच्चों का भविष्य छीना जा रहा हो। जैसा कि मैं पहले भी कह चुका हूँ,तिलक, तराजू और तलवार अन्याय को अब और सहन नहीं करेंगे। हम सड़कों पर उतरेंगे, लेकिन शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से। हमारे समाज में पढ़े-लिखे, समझदार और बुद्धिजीवी लोग हैं, जो अनुशासन और शांति के साथ अपनी बात रखेंगे। फिर भी यदि हमारी शांतिपूर्ण आवाज़ को दबाने की कोशिश की गई, तो इसकी पूरी ज़िम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी। जब हालात ऐसे बन जाएँ कि समाज को यह महसूस हो कि उसके बच्चों के जन्म तक पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं, तो विरोध स्वाभाविक है। हमारा समाज हमेशा से बलिदान देता आया है। इतिहास इसका साक्षी है। आज हम हथियार नहीं, बल्कि संविधान और कानून के दायरे में रहकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करेंगे। यदि यह कानून वापस नहीं लिया गया, तो समाज एकजुट होकर लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करेगा।
वहीं, शिक्षक नेता शंभू सिंह मेड़तिया ने कहा कि यदि युवा वर्ग को आंदोलन के दौरान हिंसात्मक रास्ता अपनाने के लिए मजबूर किया गया, तो इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी सरकार और कानून व्यवस्था की होगी। ये रहे मौजूद प्रेस वार्ता के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता हस्तीमल सारस्वत,कन्हैया लाल पारीक, मानसिंह मेड़तिया, गजेंद्र सिंह राठौड़, अनिल माथुर, दिनेश गौड़, प्रकाश जैन, श्याम सिंह साजडा, राधेश्याम डागा सहित विभिन्न समाजों के प्रतिनिधि और पदाधिकारी उपस्थित रहे।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *