पाकुड़ और साहिबगंज के पत्थर व्यवसायियों द्वारा रेलवे की विभिन्न समस्याओं को लेकर 11 दिनों से जारी आंदोलन समाप्त हो गया है। यह आंदोलन रेलवे के महाप्रबंधक (जीएम) के साथ हुई वार्ता के बाद खत्म हुआ। इस दौरान रेलवे रैक में पत्थर और कोयले की ढुलाई बाधित थी। व्यवसायी रेलवे द्वारा यात्रियों की उपेक्षा और सुविधाओं की कमी से नाराज थे। उनकी प्रमुख मांगों में दिल्ली-पटना के लिए सीधी ट्रेन सेवा शुरू करना, कोविड के दौरान बंद की गई पैसेंजर और एक्सप्रेस ट्रेनों को फिर से चलाना, यात्रियों को बेहतर सुविधां देना और शताब्दी एक्सप्रेस का पाकुड़ में ठहराव शामिल था। इन मांगों को लेकर 16 जनवरी से पत्थर ढुलाई और 24 जनवरी से कोयला ढुलाई बंद कर दी गई थी। ढुलाई बाधित होने से रेलवे को करोड़ों रुपए के राजस्व का नुकसान हो रहा था। इस आंदोलन को झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने समर्थन दिया था। सांसद विजय हांसदा के अलावा साहिबगंज और पाकुड़ जिले के सभी विधायकों ने भी इसे नैतिक समर्थन दिया था। झामुमो के केंद्रीय सचिव पंकज मिश्रा लगातार रेलवे की उपेक्षा पर नाराजगी व्यक्त कर रहे थे। रेलवे के जीएम ने आंदोलन कर रहे प्रतिनिधियों के साथ वार्ता की। इस दौरान शताब्दी एक्सप्रेस का पाकुड़ में ठहराव, भागलपुर के लिए एक लोकल ट्रेन का प्रावधान जो दिल्ली जाने वाली ट्रेन से जुड़े, पाकुड़ में बंद पड़े एस्केलेटर को चालू करना, साहिबगंज में लोको शेड का निर्माण और वनांचल एक्सप्रेस में फर्स्ट एसी का एक पूरा कोच जोड़ने का आश्वासन दिया गया। इन आश्वासनों के बाद व्यवसायियों ने आंदोलन वापस ले लिया। वार्ता के दौरान झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय सचिव पंकज मिश्रा, महेशपुर विधायक स्टीफन मरांडी, लिट्टीपाड़ा विधायक हेमलाल मुर्मू, केंद्रीय कमेटी के सदस्य और पाकुड़ व साहिबगंज के कुछ पत्थर व्यवसायी मौजूद थे।


