अपोलो नगर हाउसिंग सोसायटी की बसाई योजना:जेडीए ने 7 साल पहले 30 को पट्टे दिए, अब आवंटियों को मुआवजे बिना खातेदार को पट्टे देने की तैयारी

सात साल पहले पृथ्वीराज नगर में जिस जमीन काे अवाप्तशुदा मानकर काॅलाेनी का नियमन कर दिया, अब जेडीए आवंटियाें काे बिना मुआवजा दिए इसी जमीन पर खातेदाराें काे पट्टे देने की तैयारी कर रहा है। खातेदार काे पट्टे देने की फाइल जाेन में चलते ही जेडीए पट्टाें पर पूर्व में बसे हुए आवंटियाें में हलचल मची है। जमीन पर बसे आवंटी अब मामले काे लेकर जाेन से लेकर जेडीए उच्चाधिकारियाें के पास चक्कर काट रहे हैं। वहीं आवंटियाें ने काेर्ट में भी याचिका दायर कर दी है। मामला पीआरएन उत्तर में जगदम्बा नगर-ए का है, जेडीए ने इस काॅलाेनी का नियमन 2017 में ही कर दिया था और करीब 30 से अधिक आवंटियाें के पास जेडीए पट्टे हैं। 10 बीघा में बसे हैं 70 से अधिक परिवार पीआरएन उत्तर में खसरा नम्बर 106, 111, 115, 124, 108 और 117 काे जेडीए अवाप्तशुदा जमीन मानकर 106, 111, 115, 124 का नियमन 2014 में नियमन कर दिया। इसके अलावा 108 और 117 कुल 10 बीघा 15 बिस्वा जमीन पर बसे जगदम्बा नगर-ए की जेडएलसी कर नियमन किया। अपाेलाे नगर हाउसिंग साेसायटी ने जगदम्बा नगर-ए सृजित किया था। हाईकाेर्ट के अवाप्तशुदा जमीन पर बसी काॅलाेनियाें के नियमन के आदेश के बाद जेडीए ने 2017 में खसरा नम्बर 108 और 117 बसे भूखंडाें काे नियमन कर आवंटन दर पर 30 पट्टे जारी किए। यह जमीन जेडीए के नाम दर्ज है और विकसित काॅलाेनी में परिवार निवास कर रहे हैं। इस याेजना में इन दाेनाें खसराें पर करीब 70 से भूखंडधारी हैं। रेवेन्यू काेर्ट के आदेश की आड़ में बिना मुआवजा दिए नियमन की तैयारी खातेदार और अपाेलाे नगर हाउसिंग साेसायटी के बीच इन दाेनाें खसराें पर मालिकाना हक काे लेकर विवाद हाे गया। रेवेन्यू काेर्ट ने खातेदार के हक में फैसला दिया और इस आदेश के आधार पर खातेदार ने जाेन में पट्टे के लिए आवेदन कर दिया। जाेन में इस फाइल पर पट्टे देने की तैयारी चल रही है, इस मामले काे लेकर आवंटियाें ने उच्चाधिकारियाें से गुहार लगाई है। सवाल यह है कि जब जेडीए जमीन का अवाप्तशुदा मानकर साेसायटी पट्टाें पर बसे भूखंडधारियाें काे आवंटित दर नियमन कर दिया ताे अब आवंटियाें काे बिना मुआवजा दिए कैसे दुबारा नियमन किया जा सकता है?

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