सिस्टम की फाइलों में उलझी सड़क:सिक्स लेन के बीच 99 पेड़, 84 पोल बने बाधा, पेड़ों के बदले मांगी 11 एकड़ जमीन

म्यूजियम सर्किल से बीछवाल के बीच 2 साल में पीडब्ल्यूडी 3 किलोमीटर सड़क बना पाया। यहां इतनी बाधाएं और सरकारी महकमें इन्वॉल्व हैं कि काम बढ़ने से ज्यादा रुक रहा है। श्रीगंगानगर चौराहे से बीछवाल तक करीब 80 बिजली के पोल हैं जो सिक्स लेन के बीच आ रहे। हटाने के लिए 99 पेड़ भी काटने होंगे। वन विभाग से इसकी अनुमति मांगी तो विभाग ने 11 एकड़ जमीन बदले में मांग ली। दरअसल पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने म्यूजियम सर्किल से बीछवाल तक 11 किलोमीटर सिक्स लेन मंजूर की थी। इसके लिए 33 करोड़ रुपए मंजूर किए थे। सरकार ने टेंडर किए। बीछवाल की ओर से सिक्स लेन का काम शुरू हुआ। 3 किमी सड़क बन भी गई लेकिन जैसे ही एग्रीकल्चर यूनिर्वसिटी के करीब आए तो बीच में बिजली के खंभे और पेड़ आ गए। उनको हटाए बिना सिक्स लेन बन नहीं सकता। श्रीगंगानगर से बीछवाल की ओर चलने पर बाई साइड में करीब 31 बिजली और दूसरी साइड में 45 से ज्यादा बिजली के खंभे हैं जो सिक्स लेन के बीच आ रहे। बिजली के खंभे हटाने और सिक्स लेन का रास्ता क्लियर करने के लिए 99 पेड़ भी बीच में आ रहे। इन पेड़ों को काटने की अनुमति दो साल पहले ही पीब्डब्ल्यूडी विभाग ने वन विभाग से मांगी थी। पहले तो वन विभाग ने कोई एक्शन नहीं लिया। अनसुना कर दिया। अब खबर आई कि 99 पेड़ काटने के बदले 11 एकड़ जमीन मांगी है ताकि वहां काटे गए पेड़ों के बदले दूसरे पेड़ लगाए जा सकें। अब जमीन पीडब्ल्यूडी के पास है नहीं। इसलिए इस मामले को अब कलेक्टर को जानकारी दे दी गई। कलेक्टर राजस्व या बीडीए से अगर जमीन वन विभाग को उपलब्ध कराएं तो ही पेड़ कटेंगे और तभी सड़क बनेगी। 33 में 3 करोड़ ही बजट मिला जो 33 करोड़ रुपए मंजूर हुए वो पूर्ववर्ती सरकार ने मंजूर किया था। शुरू के 3 किलोमीटर सड़क का करीब पौने तीन करोड़ रुपए का बजट भी वर्तमान सरकार ने मुश्किल से पारित किया। 33 करोड़ के आनुमानित बजट में अब तक 3 करोड़ ही मंजूर हुए। वन विभाग पेड़ काटने को राजी भी हो जाए तो भी वापस बजट की जरूरत पड़ेगी तो वो सरकार से मिलेगा ये कहना मुश्किल हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण बीछवाल में बन रहे वन विभाग के बॉयोलॉजिकल पार्क है। एक सरकार ने इसके लिए 35 करोड़ रुपए मंजूर किए थे। 6 साल से ज्यादा हो गए लेकिन अब तक इस पर आधा पैसा भी खर्च नहीं हेा पाया। ना पूरे पिंजरे बने ना पूरा उसका ढांचा। एक-एक करोड़ करके मिल रहे जिससे कुछ दिन काम चलता है कुछ दिन रुक जाता है। अभी एक साइड के खंभे शिफ्टिंग फिलहाल पीडब्ल्यूडी ने एक साइड के खंभे हटाने के लिए तो राशि जमा कर दी है। क्योंकि एक साइड में सिर्फ 9 ही पड़े हैं। दूसरी साइड में खंभे भी ज्यादा हैं और पेड़ भी ज्यादा हैं। उस साइड पानी की पाइप लाइन भी है जो बीछवाल से बीकानेर शहर की ओर आ रही है। हालांकि ये पाइप लाइन तो सिक्स लेन के बीच नहीं आ रही पर आर्मी एरिया की एक लाइन आ रही है जिस पर अब आर्मी भी लाइन हटाने के लिए राजी हो गई है। बावजूद इसके इन प्रोसेस के पूरे होते होते भी एक साल लगेगा। यानी 2026 तक भी सिक्स लेन बन जाए तो गनीमत ही समझी जाए।

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