छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर से शुरू हुई धान खरीदी अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। 31 जनवरी को खरीदी का आखिरी दिन है, लेकिन इसी बीच सोशल मीडिया पर एक ऑडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने खरीदी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह ऑडियो समिति प्रबंधकों और एक खाद्य अधिकारी की कॉन्फ्रेंस कॉल का बताया जा रहा है। इसमें टोकन की स्थिति को लेकर चर्चा हो रही है, जहां अधिकारी अलग-अलग केंद्रों से कटे और पेंडिंग टोकन की जानकारी लेते नजर आ रहे हैं। ऑडियो में हरदी गांव के समिति प्रबंधक यह कहते सुने जा रहे हैं कि उनके केंद्र में खरीदी का टारगेट 58 तक पहुंच सकता है। इस पर खाद्य अधिकारी नाराजगी जताते हुए कहते हैं कि तुम ही क्रॉस कर रहे हो भाई। समिति प्रबंधक आगे बोल रहा है कि पटवारी लोग टोकन वेरिफाई कर रहे है, उन्हें मना किया गया है। फिर भी टोकन ओके हो रहे हैं और अभी भी 11 किसान लंबित हैं।
आवेदक को ऑनलाइन एंट्री भी नहीं करना है इसके बाद अधिकारी सभी समिति प्रबंधकों को निर्देश देते हैं कि फिलहाल किसी भी किसान का टोकन नहीं काटा जाए और नए आवेदन आने पर उन्हें पेंडिंग रखा जाए। आवेदन को ऑनलाइन एंट्री भी नहीं करना है। अधिकारी ने हरदी गांव के समिति प्रबंधक को चेतावनी देते हुए अधिकारी कहते हैं कि तुम देख लो यार… शिकायत बहुत आ रही है इस ऑडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि मामला सारंगढ़ जिले का है, हालांकि प्रशासन की ओर से अब तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
कांग्रेस विधायक बोली-किसान परेशान है इस मामले में सारंगढ़ की विधायक उत्तरी गणपत जांगड़े ने कहा है कि कुल मिलाकर सरकार किसानों का धान खरीदना नहीं चाह रही है। जो वीडियो वायरल हुआ है उसमें अधिकारी धान नहीं खरीदने की बात कह रहा है। आखिर यह कौन होता है ऐसा कहने वाला। इन्हें नियमों के मुताबिक धान खरीदना चाहिए। विधायक ने आगे कहा कि
यह अधिकारी समिति प्रबंधकों को धमका रहा है, यदि आप लोग टोकन काटोगे तो देख लेना।
आगे जांगड़े ने कहा कि जब से भारतीय जनता पार्टी की सरकार आई है। किसी इसी तरह परेशान हैं। छोटे किसान धूप में बैठे हुए हैं लेकिन मंडी में उनका धान नहीं दिया जा रहा है। इस मामले में जो व्यास नारायण नाम के अधिकारी का नाम सामने आ रहा है उस पर कार्यवाई होनी चाहिए। विधायक ने कहा कि कांग्रेस की सरकार में ऐसी अव्यवस्था नहीं थी। वहीं इस मामले में सारंगढ़ बिलाईगढ़ के कलेक्टर डॉ संजय कन्नौजे से पक्ष जानने का प्रयास किया गया। लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया। साढे 29 हजार करोड रुपए हो चुका है भुगतान सरकार के आंकड़ों की माने तो खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के तहत 23.48 लाख किसान समर्थन मूल्य पर धान बेच चुके हैं और उन्हें कुल 29,597 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। सरकार का दावा है कि डिजिटल और समयबद्ध प्रणाली से किसानों को सीधा लाभ मिल रहा है। प्रदेश में धान खरीदी पूरी तरह सुचारू, तेज़ और पारदर्शी तरीके से की जा रही है।


