यूजीसी कानून के खिलाफ जयपुर में भी विरोध तेज:सवर्ण समाज ने निकाली मशाल यात्रा, “यूजीसी रोल बैक” के लगे नारे

जयपुर में केंद्र सरकार की ओर से लाए गए यूजीसी कानून के खिलाफ विरोध शुरू हो गया है। करणी सेना के नेतृत्व में बुधवार शाम को वीर दुर्गा दास सर्किल से खातीपुरा तक मशाल जुलूस निकाला गया। जुलूस में बड़ी संख्या में युवा हाथों में मशाल लेकर सड़कों पर उतरे और यूजीसी कानून को वापस लेने की मांग की। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने “यूजीसी रोल बैक” और “मोदी तेरी तानाशाही नहीं चलेगी” जैसे नारे लगाए।
मशाल जुलूस के दौरान करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना के नेतृत्व में युवाओं ने यूजीसी कानून की प्रतियां जलाकर विरोध दर्ज कराया। जुलूस में हजारों की संख्या में युवा शामिल रहे, जिससे वीर दुर्गा दास सर्किल से खातीपुरा तक का इलाका कुछ समय के लिए पूरी तरह प्रदर्शन स्थल में तब्दील हो गया। पुलिस की मौजूदगी में यह जुलूस शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। विधानसभा घेराव को लेकर राजपूत सभा भवन में बैठक
जुलूस का नेतृत्व कर रहे करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने बताया कि यह कानून शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ है और इसे बिना सभी वर्गों से चर्चा किए लागू किया जा रहा है। बताया कि इस कानून से कॉलेजों और यूनिवर्सिटी की स्वायत्तता खत्म होगी और सरकार का सीधा दखल बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि करणी सेना के साथ-साथ सभी सवर्ण समाज इस कानून का विरोध कर रहे हैं।
मकराना ने बताया कि यूजीसी कानून के विरोध को लेकर गुरुवार को जयपुर के पांच बत्ती सर्कल स्थित राजपूत सभा भवन में सवर्ण समाज की बैठक बुलाई गई है। बैठक में परशुराम सेना, ब्राह्मण समाज, अग्रवाल महासभा सहित अन्य सवर्ण जातियों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी और आने वाले दिनों में विधानसभा घेराव को लेकर निर्णय लिया जाएगा।
क्या है यूजीसी कानून और क्यों हो रहा है विरोध
केंद्र सरकार की ओर से लाए गए नए यूजीसी कानून में उच्च शिक्षा से जुड़े कई नियमों में बदलाव की बात कही गई है। प्रस्तावित कानून के तहत कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में नियुक्तियों, पाठ्यक्रम, प्रशासन और संचालन में यूजीसी और केंद्र सरकार की भूमिका बढ़ाने का प्रावधान है। विरोध करने वाले संगठनों का कहना है कि इससे राज्यों और शैक्षणिक संस्थानों की स्वायत्तता कमजोर होगी। उनका आरोप है कि यह कानून शिक्षा को केंद्रीकृत करेगा और पारंपरिक शिक्षा ढांचे को नुकसान पहुंचाएगा। इसी वजह से देश के अलग-अलग हिस्सों में इसके खिलाफ विरोध शुरू हो गया है और अब जयपुर में भी इसका असर साफ दिखाई देने लगा है।

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