सांकेतिक हड़ताल पर रहे बिजली कर्मचारी:भटकते नजर आए उपभोक्ता, निजीकरण का जताया विरोध

निजीकरण के विरोध में विद्युत विभाग के कर्मचारी सोमवार को एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल पर रहे। कर्मचारियों ने हड़ताल पर रहकर जोधपुर मुख्यालय पर हुए धरना-प्रदर्शन में उपस्थिति दर्ज करवाई। कर्मचारियों की हड़ताल के कारण सोमवार को विद्युत विभाग के कार्यालय सूने पड़े रहे और बिल कलेक्शन, नए कनेक्शन, मीटर लगाने, टेस्टिंग सहित रूटीन के अन्य कार्य प्रभावित हुए। विशेषकर उन उपभोक्ताओं को परेशान होना पड़ा जो बिल भरवाने के लिए कार्यालय में आए थे, लेकिन अंतिम तिथि होने के बावजूद बिल जमा नहीं करवा पाए। कुछ इसी तरह के हालात जंक्शन के सहायक अभियंता कार्यालय में देखने को मिले। एईएन कार्यालय में आए उपभोक्ताओं को बिना बिल भरवाए वापस लौटना पड़ा। गांव चन्दड़ा निवासी सुखपाल सिंह ने बताया कि वह अंतिम तिथि होने के कारण बिल जमा करवाने के लिए सोमवार की सुबह जंक्शन स्थित विद्युत विभाग के एईएन कार्यालय पहुंचा तो लेकिन कोई कर्मचारी नहीं मिला। कार्यालय के ताले लगे हुए थे। उनके कार्यालय में खड़े-खड़े कई अन्य लोग भी कार्यालय पर ताला लगा देखकर वापस लौट गए। उन्हें यह नहीं समझ आ रहा था कि वे बिल कहां जमा करवाएं। साथ ही कहा कि निजीकरण के विरोध में आंदोलन कर रहे बिजली कर्मचारियों की मांग भी जायज है। विद्युत विभाग का निजीकरण होने पर उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। बिजली की दरें भी महंगी होंगी। उन्होंने मांग की कि बिजली कर्मचारियों की जायज मांग पूरी हो ताकि जनता को परेशान न होना पड़े। गांव शेरगढ़ निवासी ने बताया कि वह भी बिल भरवाने के लिए एईएन कार्यालय आया था, लेकिन कार्यालय बंद पड़ा था। बीस किलोमीटर दूर आने के बाद भी बिल नहीं भरवा सका। अब उसे मंगलवार को दोबारा एईएन कार्यालय में आना पड़ेगा। उन्होंने भी विद्युत विभाग का निजीकरण न करने की मांग का समर्थन किया। उधर, डिस्कॉम के अधिशाषी अभियंता अरविन्द गढ़वाल ने कहा कि कर्मचारी एकजुट होकर निजीकरण का विरोध कर रहे हैं। कर्मचारियों में भय व्याप्त है कि निजीकरण होने पर उनकी नौकरी खतरे में पड़ जाएगी। इसीलिए कर्मचारी एक दिन की सांकेतिक हड़ताल पर हैं।

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