बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष चुनाव से पहले पीएम से मिले राजेन्द्र शुक्ल:दावेदारों में हेमंत खंडेलवाल सबसे आगे; क्षत्रिय नेताओं की दावेदारी कमजोर

दिल्ली में चुनाव प्रचार थमने के बाद मध्यप्रदेश में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव की सरगर्मी तेज हो गई है। प्रदेश अध्यक्ष के दावेदारों में शुमार डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ल ने दिल्ली में पीएम मोदी से मुलाकात की। ब्राह्मण वर्ग के नेताओं में राजेन्द्र शुक्ल का नाम तेजी से चल रहा है। शुक्ल के अलावा पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा, गोपाल भार्गव, रामेश्वर शर्मा, आलोक शर्मा, अर्चना चिटनीस, आशीष दुबे प्रदेश अध्यक्ष की रेस में शामिल हैं। भोपाल में सोमवार को प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव में भाग लेने वाले प्रदेश प्रतिनिधियों की लिस्ट पर मंथन चला। प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा ने लंबी बैठक की। प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव में 400 से ज्यादा प्रतिनिधि भाग लेंगे। इनमें 4 सांसद, 16 विधायक और 230 विधानसभाओं से एक-एक प्रतिनिधि के अलावा दो-दो विधानसभाओं के क्लस्टर का एक प्रतिनिधि हिस्सा लेगा। यदि किसी जिले में तीन, पांच या सात विधानसभाएं हैं। तो दो-दो विधानसभाओं के क्लस्टर बनने के बाद बची सिंगल विधानसभा को एक अलग क्लस्टर मानकर प्रदेश प्रतिनिधि चुना गया। ऐसे प्रदेश भर से अब तक 400 से ज्यादा प्रतिनिधियों की लिस्ट तैयार हुई है। प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव को लेकर दो स्थितियां
एमपी बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव कराने के लिए केन्द्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पर्यवेक्षक बनाया गया है। एमपी बीजेपी को अब तक धर्मेंद्र प्रधान के भोपाल आने का कार्यक्रम नहीं मिला है। संभावना ये है कि 6 और 7 फरवरी को प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव हो सकता है। यदि इन तारीखों में चुनाव नहीं हुआ तो फिर 12 फरवरी तक चुनाव टाला जा सकता है। बैतूल से विधायक हेमंत खंडेलवाल सबसे आगे
प्रदेश अध्यक्ष के दावेदारों की रेस में बैतूल से विधायक हेमंत खंडेलवाल सबसे आगे हैं। हेमंत के नाम पर सीएम डॉ. मोहन यादव सहमत हैं। हेमंत के नाम पर संघ भी सहमत है। बीजेपी के सूत्र बताते हैं कि बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष का कार्यकाल तीन साल का होता है। अगले तीन सालों में विधानसभा और लोकसभा कोई चुनाव नहीं हैं। ऐसे में पार्टी वोटर्स के गणित से ज्यादा पार्टी में समन्वय बनाकर चलने वाले चेहरे को कमान देने की तैयारी में है। ठाकुर नेताओं की दावेदारी कमजोर
बीजेपी ने छत्तीसगढ़ में क्षत्रिय वर्ग के नेता किरण देव सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। ऐसे में छत्तीसगढ़ के पड़ोसी राज्य एमपी में क्षत्रिय वर्ग से प्रदेश अध्यक्ष बनने की संभावना बहुत कम है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष की रेस में पूर्व मंत्री अरविंद भदौरिया और बृजेन्द्र प्रताप सिंह के नाम शामिल हैं। आदिवासी कार्ड चला तो फग्गन को मौका
एमपी में 22 फीसदी आदिवासी वोटर हैं और विधानसभा की 47 सीटें आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित हैं। इनमें से 51% सीटें ही बीजेपी के पास हैं। एमपी में 5 बार से बीजेपी की सरकार होने के बावजूद आदिवासी क्षेत्रों में पकड़ नहीं बन पा रही है। ट्राइबल बेल्ट में कांग्रेस के असर को कम करने के लिए आदिवासी नेताओं को प्रदेश अध्यक्ष की कमान दी जा सकती है। संघ की ओर से खरगोन सांसद गजेंद्र सिंह पटेल का नाम है। वहीं मंडला सांसद और पूर्व केन्द्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते भी प्रदेश अध्यक्ष बनने के लिए लॉबिंग कर रहे हैं। अंबेडकर पॉलिटिक्स के चलते दलित नेता भी आगे
संसद में केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के अंबेडकर पर दिए गए बयान के बाद कांग्रेस हमलावर है। महू में 27 जनवरी को कांग्रेस लीडरशिप ने जय भीम, जय बापू, जय संविधान रैली का आयोजन किया। इस रैली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी सहित देश भर के दिग्गज कांग्रेसी नेता जुटे और बीजेपी पर हमला बोला। अंबेडकर पर बढ़ती पॉलीटिक्स की काट के लिए बीजेपी एमपी में दलित वर्ग के नेता को कमान दे सकती है। ऐसे में बीजेपी एससी मोर्चे के राष्ट्रीय अध्यक्ष लाल सिंह आर्य या नरयावली विधायक प्रदीप लारिया को मौका मिल सकता है। मध्यप्रदेश भाजपा प्रदेशाध्यक्ष चुनाव के लिए इनकी दावेदारी सबसे मजबूत

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