शहर के सबसे बड़े जनाना अस्पताल में बुधवार दोपहर अचानक आग लगने की सूचना से अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही प्रशासन, फायर ब्रिगेड, एसडीआरएफ और सिविल डिफेंस की टीमें तत्काल मौके पर पहुंच गईं। अस्पताल परिसर में कुछ देर के लिए हड़कंप जैसा माहौल बन गया। बाद में प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया कि यह वास्तविक घटना नहीं, बल्कि आपदा प्रबंधन को परखने के लिए आयोजित मॉक ड्रिल थी। हुआ ये कि कंट्रोल रूम से सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की गाड़ियां रवाना हुईं और अस्पताल भवन पर पानी की बौछारें डालने का अभ्यास किया गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एसडीआरएफ की टीम ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। सिविल डिफेंस के जवान भी पूरे समय सक्रिय रहे। मॉक ड्रिल के दौरान अस्पताल के अंदर मौजूद लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की प्रक्रिया अपनाई गई। घायलों को स्ट्रेचर पर रेस्क्यू कर एंबुलेंस के जरिए बाहर भेजने का अभ्यास भी किया गया। पूरे ऑपरेशन के दौरान अस्पताल प्रशासन, मेडिकल स्टाफ और आपदा प्रबंधन टीमें समन्वय के साथ काम करती नजर आईं। सूचना मिलते ही एडीएम सिटी राहुल सैनी सहित पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। बाद में एडीएम सिटी राहुल सैनी ने बताया कि इस मॉक ड्रिल का उद्देश्य यह जांचना था कि आपात स्थिति में विभिन्न विभाग कितनी तेजी से प्रतिक्रिया देते हैं, अस्पताल प्रशासन की तत्परता कैसी रहती है और मेडिकल इमरजेंसी टीमें किस प्रकार समन्वय बनाकर कार्य करती हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के अभ्यास से आपदा प्रबंधन प्रणाली को और अधिक मजबूत किया जा सकता है, ताकि किसी वास्तविक आपात स्थिति में जान-माल की क्षति को न्यूनतम रखा जा सके। जनाना अस्पताल में पहले बिजली की वायरिंग जर्जर हालत में थी, जिससे किसी भी समय आग लगने का खतरा बना हुआ था। इसके साथ ही अस्पताल का फायर फाइटिंग सिस्टम भी लंबे समय से पूरी तरह चालू हालत में नहीं था। ऐसे में मरीजों व स्टाफ की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे थे। अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नगेंद्र सिंह भदौरिया ने बताया कि करीब छह माह पहले ही पीडब्ल्यूडी की विद्युत शाखा द्वारा 1.26 करोड़ रुपए की लागत से बिजली वायरिंग सिस्टम और फायर फाइटिंग सिस्टम को दुरुस्त कराया गया है। इसके बाद फायर फाइटिंग सिस्टम को चालू अवस्था में बनाए रखने के लिए अस्पताल में एक फायर मैन की भी तैनाती की गई है। पीडब्ल्यूडी विद्युत शाखा के एक्सईएन हेमचंद यादव ने बताया कि कुल 1.26 करोड़ की राशि में से करीब 70 लाख रुपए फायर फाइटिंग सिस्टम को पूरी तरह ऑपरेशनल बनाने पर खर्च किए गए हैं। इसके तहत अस्पताल परिसर में हाइड्रेंट लाइन, फायर डिटेक्टर (सेंसर), चौकी पम्प और मुख्य पम्प का सिस्टम तैयार किया गया है। उन्होंने बताया कि आग लगने की स्थिति में यदि बिजली फाल्ट हो जाए या सप्लाई बंद करनी पड़े, तब भी इंजन के जरिए फायर फाइटिंग सिस्टम को चालू रखा जा सकता है। पूरे सिस्टम को रनिंग कंडीशन में रखने के लिए समय-समय पर मॉक ड्रिल के जरिए इसकी जांच की जाएगी, ताकि आपात स्थिति में किसी तरह की तकनीकी बाधा न आए।


