कचरा प्रबंधन नियम:स्वच्छता की परिभाषा बदली, 40 हजार लीटर पानी वाले थोक कचरा उत्पादक

केंद्र सरकार ने स्वच्छता के नियमों में बदलाव किया है। अब जो संस्थान रोज़ 40 हजार लीटर या उससे ज़्यादा पानी इस्तेमाल करते हैं, उन्हें थोक कचरा उत्पादक (बल्क वेस्ट जनरेटर) माना जाएगा। ये नए ठोस कचरा प्रबंधन नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे। इस बदलाव के बाद स्कूल-कॉलेज, होटल, अस्पताल व बड़े व्यावसायिक परिसर बड़ी संख्या में थोक कचरा उत्पादकों की सूची में आ जाएंगे। पहले इस तरह पानी की खपत को मापदंड नहीं माना जाता था। नए नियमों के अनुसार, थोक कचरा उत्पादकों को नगर निगम से सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य होगा। उन्हें अपने कचरे के निपटान की जिम्मेदारी भी खुद उठानी पड़ेगी। इंदौर में करीब 3 हजार बल्क कनेक्शन हैं। नए नियम लागू होने के बाद यह संख्या और बढ़ सकती है। इससे कचरा प्रबंधन की निगरानी व जवाबदेही भी बढ़ेगी। पर्यावरण मंत्रालय ने 2016 के पुराने नियमों को हटाकर ये नए नियम जारी किए हैं। सरकार सुनिश्चित करना चाहती है कि जो ज्यादा कचरा पैदा करे, वही निपटान की जिम्मेदारी उठाए। अब चार श्रेणी में कचरा अलग करना अनिवार्य

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