ये प्राइमरी स्कूल नहीं…. खंडवा मेडिकल कॉलेज है:सर्जरी में एक ही प्रोफेसर, उन्हें प्रतिनियुक्ति पर भेजा, कॉलेज की मान्यता पर ही संकट

प्राइमरी स्कूलों में एक टीचर के तबादले से पूरे स्कूल के छात्रों की पढ़ाई पर संकट की खबरें आती रही हैं, लेकिन अब खंडवा मेडिकल कॉलेज में भी ऐसा मामला सामने आया है। 120 एमबीबीएस सीटों वाले नंदकुमार सिंह चौहान शासकीय मेडिकल कॉलेज खंडवा के सर्जरी विभाग के एचओडी और एकमात्र प्रोफेसर डॉ. अजय गंगजी को प्रतिनियुक्ति पर इंदौर भेज दिया गया है। इससे कॉलेज की मान्यता पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। यही नहीं, इस प्रतिनियुक्ति में नियमों की भी अनदेखी की गई है। इसके पहले भी डॉ. गंगजी को इंदौर भेजने के दो से तीन प्रस्ताव आ चुके थे। तब कॉलेज प्रबंधन ने आपत्ति ली थी, इसलिए प्रतिनियुक्ति नहीं हो सकी थी। लेकिन हाल ही में आपत्ति के बावजूद उनके आदेश जारी हो गए। अब खंडवा में सर्जरी विभाग में केवल एसोसिएट प्रोफेसर बचे
खंडवा मेडिकल कॉलेज के सर्जरी विभाग में 4 लोगों की पदस्थापना है, जिसमें एक प्रोफेसर और तीन एसोसिएट प्रोफेसर हैं। डॉ. अजय गंगजी सर्जरी विभाग के एचओडी भी थे और एकमात्र प्रोफेसर भी। जनवरी दूसरे हफ्ते में जारी एक आदेश में डॉ. गंगजी को एमजीएम के पी.एम.आर विभाग में प्रतिनियुक्ति पर 3 साल के लिए लाया गया है। इसमें उन्हें सर्जरी विभाग में प्रोफेसर के रूप में काम करने को कहा है। यानी खंडवा कॉलेज के सर्जरी विभाग के एचओडी को प्रतिनियुक्ति पर इंदौर में प्रोफेसर सर्जरी के रूप में काम करवाया जाएगा। नियम ताक पर, एक ही प्रोफेसर होने पर भी प्रतिनियुक्ति डॉ. गंगजी के प्रतिनियुक्ति और पदस्थापना को लेकर जो आदेश जारी किया गया है, उसमें शैक्षणिक आदर्श सेवा नियम 2018 के 10.2 का हवाला दिया गया है। जबकि इस नियम के मुताबिक मेडिकल कॉलेज की कार्यकारिणी समिति की सहमति के बाद ही रिक्त पद भरेगी। दूसरा नियम यह है कि प्रतिनियुक्ति में मूल नियोक्ता की सहमति अनिवार्य है। लेकिन खंडवा मेडिकल कॉलेज में सर्जरी विभाग में एक ही प्रोफेसर होने के बावजूद प्रतिनियुक्ति दे दी गई। इंदौर में 4 प्रोफेसर पहले से, फिर प्रतिनियुक्ति पर क्यों बुलाया
एमजीएम के सर्जरी विभाग में 25 लोगों की पदस्थापना है। इसमें 4 प्रोफेसर, 8 एसोसिएट प्रोफेसर, 12 असिस्टेंट प्रोफेसर और डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया खुद सर्जरी विभाग से हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि प्रतिनियुक्ति पर लाने की क्या जरूरत थी।
ऑटोनॉमस कॉलेज में यह गलत प्रैक्टिस है, यूनिट अधूरी रह जाएगी मामले में एमजीएम मेडिकल कॉलेज के पूर्व डीन डॉ. वीपी पांडे का कहना है कि ऑटोनॉमस कॉलेज में इस तरह की प्रैक्टिस गलत है। कॉलेज के पूर्व डीन डॉ. संजय दीक्षित कहते हैं कि जिस कॉलेज में एक मात्र प्रोफेसर है, वहां से जाने पर उनकी यूनिट अधूरी हो जाएगी। इससे मान्यता पर संकट आ सकता है। हमने तो विरोध किया, आदेश के आगे बेबस
हमने उनकी प्रतिनियुक्ति को लेकर कई बार विरोध किया था। अब शासन के आदेश के आगे हम क्या कर सकते हैं। फिर भी विभाग स्तर पर हमने वरिष्ठ लोगों को सूचित किया है।
– डॉ. संजय कुमार दादू, डीन खंडवा मेडिकल कॉलेज हाल ही में पद संभाला है, मुझे जानकारी नहीं
मैंने हाल ही में अपना पदभार संभाला है। इस कारण अभी इस मामले में मुझे ज्यादा जानकारी नहीं है। मामले की जानकारी लेने के लिए थोड़ा समय दीजिए, इसके बाद ही कुछ
बता पाऊंगा।
– धनराजू एस, कमिश्नर हेल्थ मामला गंभीर, प्रमुखता से इसे दिखवाएंगे
मेरे पास अभी हाल ही में प्रभार आया है। मामला गंभीर है। इसे प्राथमिकता से दिखवाएंगे। पीएस हेल्थ संदीप यादव के छुट्टी से लौटते ही उनके ध्यान में भी मामला लाएंगे। – सुखवीर सिंह, प्रभारी पीएस हेल्थ
स्टाफ पहले ही कम, एनएमसी ने जारी किया था नोटिस
खंडवा कॉलेज को नेशनल मेडिकल कमिशन(एनएमसी) ने 7 मई 2025 को खामियों को लेकर शोकॉज नोटिस दिया था। इसमें सभी विभागों में फैकल्टी/रेजिडेंट/ट्यूटर की कमी पाई गई थी। एनएमसी ने लिखा था कि इन कमियों के कारण कॉलेज पर एक करोड़ तक का जुर्माना और अन्य कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। इससे साफ होता है कि कॉलेज के पास पहले ही स्टाफ की कमी है।

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