बीना के बड़केश्वर बिहारी मंदिर में मंगलवार से रामकथा का शुभारंभ हुआ। कथावाचक संत सुरेशानंद महाराज ने रामकथा की महिमा का वर्णन करते हुए बताया कि महर्षि वाल्मीकि ने संस्कृत में रामायण और गोस्वामी तुलसीदास ने अवधि भाषा में श्रीरामचरितमानस की रचना की है। उन्होंने बताया कि सर्वप्रथम भगवान शिव ने माता पार्वती को रामकथा सुनाई। इस दौरान एक कौआ भी वहां उपस्थित था, जिसे बाद में काकभुसुंडि के रूप में जन्म मिला। यही कारण है कि देवी-देवताओं के बाद पहला मानव श्रोता नहीं, बल्कि एक कौआ था जिसे रामकथा सुनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। श्रीरामचरित मानस में तीन प्रमुख संवाद हैं – पहला शिव-पार्वती के बीच, दूसरा काकभुसुंडि और गरुड़ के बीच, तथा तीसरा मुनि याज्ञवल्क्य और महर्षि भारद्वाज के बीच। काकभुसुंडि की कहानी का जिक्र करते हुए कथावाचक ने बताया कि लोमश ऋषि के श्राप से वे कौआ बने, लेकिन बाद में ऋषि ने पश्चाताप करते हुए उन्हें राम मंत्र और इच्छामृत्यु का वरदान दिया। सुरेशानंद महाराज ने कथा के अंत में कहा कि रामकथा श्रवण मात्र से मनुष्य के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। यह कथा आज भी पूरी श्रद्धा के साथ पढ़ी और सुनी जाती है।


