जयपुर मेट्रो-प्रथम एमएसीटी मामलों की विशेष कोर्ट ने तूफान के दौरान चलती कार पर पेड़ गिरने से हुए हादसे में एक जने की मौत मामले में ड्राइवर की लापरवाही नहीं मानी है। कोर्ट ने कहा कि प्रार्थी पक्ष यह साबित नहीं कर सका कि चालक के तेजगति व लापरवाही से वाहन चलाने से एक्सीडेंट हुआ और इसमें मुकेश अग्रवाल की मौत हुई। कोर्ट ने यह आदेश पवन व अन्य की नेशनल इंश्योरेंस कंपनी व अन्य के खिलाफ दायर 3.34 करोड़ रुपए की क्लेम याचिका खारिज करते हुए दिया। बीमा कंपनी के अधिवक्ता भागचंद भारद्वाज ने बताया कि प्रार्थियों ने क्लेम याचिका में कहा कि 2 मई 2018 को मुकेश अग्रवाल अपने साथियों के साथ मूर्ति लेने के लिए रामगढ़ गए थे। वे मूर्ति लेकर रामगढ़ से हिंडौन आ रहे थे, तभी रास्ते में सुधासागर गौशाला के पास अचानक तूफान आ गया और बीमित वाहन पर सफेदा का पेड़ आकर गिर गया। हादसा चालक के लगातार वाहन चलाने के कारण हुआ, क्योंकि वह तूफान में रुका नहीं। इसके जवाब में बीमा कंपनी के मुख्य क्षेत्रीय प्रबंधक अमृत लाल मीना ने बताया कि एक्सीडेंट में बीमित वाहन में मृतक के अलावा अन्य लोग भी मौजूद थे। लेकिन उनके चोटें नहीं आई हैं और एक्सीडेंट की सूचना में यह नहीं बताया है कि वाहन कौन चालक चला रहा था। ‘एक्ट ऑफ गॉड’ या ‘दैवीय घटना’ क्या है अधिवक्ता तुषार शर्मा का कहना है कि एक्ट ऑफ गॉड का मतलब ऐसी भीषण प्राकृतिक आपदाओं से है, जो पूरी तरह से मानवीय नियंत्रण से बाहर होती हैं। इसमें मुख्य तौर पर भूकंप, बाढ़, तूफान, ज्वालामुखी विस्फोट, सुनामी, आंधी, और आकाशीय बिजली गिरना जैसी घटनाएं शामिल होती हैं। हालांकि कुछ हद तक होम इंश्योरेंस में इन प्राकृतिक आपदाओं को कवर किया है। होम इंश्योरेंस पॉलिसी स्कीम में ‘एक्ट ऑफ गॉड’ कवरेज यह सुनिश्चित करता है कि घर के मालिक प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान की भरपाई के लिए अपने घरों का पुनर्निर्माण या मरम्मत करवा सकें।


