होटल-बार, माइक्रो ब्रुअरी और सेना की कैंटीन को राहत:आबकारी नीति: 1 अप्रैल से शराब महंगी, दुकानों की फीस भी बढ़ाई

प्रदेश सरकार ने आबकारी एवं मद्य-संयम नीति 2025-29 में संशोधन करते हुए शराब की कीमतों, दुकानों की गारंटी राशि, लाइसेंस शुल्क और पैकेजिंग नियमों में बदलाव किए हैं। ये संशोधन 1 अप्रैल से लागू होंगे। इससे उपभोक्ता से लेकर शराब कारोबार से जुड़े सभी वर्ग प्रभावित होंगे। सरकार ने नई आबकारी नीति के तहत जहां शराब के दाम और दुकानों की वार्षिक गारंटी राशि बढ़ाई है, वहीं होटल-बार, माइक्रो ब्रुअरी और सेना की कैंटीन को राहत दी है। पर्यावरण संरक्षण के तहत एसेप्टिक ब्रिक पैकिंग को भी अनिवार्य किया है। बता दें कि आबकारी विभाग सरकार को सबसे ज्यादा रेवेन्यू वाले विभागों में से एक है। हर साल करीब 15 से 17 हजार रुपए को रेवन्यू मिलता है। प्रदेश में 7665 शराब के ठेके है। होटल, बार और क्लब को राहत: होटल/रेस्टोरेंट बार में माइक्रो ब्रुअरी खोलने पर पहले 2 महीने 50 प्रतिशत आबकारी ड्यूटी में छूट मिलेगी। इस तरह रेस्टोरेंट बार और होटल बार के मेन्यू कार्ड में राज्य में निर्मित हेरिटेज मदिरा को भी शामिल किया जाना आवश्यक होगा। ऑकेजनल लाइसेंस में सख्ती, राशि बढ़ाई
वार्षिक गारंटी राशि 12.5% बढ़ाई : पॉलिसी में बदलाव करते हुए शराब दुकानों की वार्षिक गारंटी राशि में 12.5 प्रतिशत बढ़ोतरी की गई है। पहले हर साल 10 प्रतिशत राशि में बढ़ोतरी होती थी। इस तरह क्लस्टर दुकानों के लिए न्यूनतम रिजर्व प्राइस में 125 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। ऑनलाइन नीलामी नवीनीकरण के लिए 2 करोड़ तक रिजर्व प्राइसेस वाली दुकानें के लिए आवेदन शुल्क 80 हजार रुपए और 2 करोड़ से अधिक की रिजर्व प्राइसेस वाली दुकान पर आवदेन शुल्क 1.20 लाख देना होगा। इस तरह देशी व राजस्थान निर्मित मदिरा के थोक मूल्य में 5 प्रतिशत इजाफा किया गया है। आईएमएफएल व बीयर पर नई आबकारी ड्यूटी स्लैब लागू की है। इससे देशी और अंग्रेजी के शराब के दाम मार्केट में करीब 10 प्रतिशत तक बढ़ जाएंगे। सेना की कैंटीन में सप्लाई पर आबकारी ड्यूटी में छूट दी है। इन्हें यह राशि 70 फीसदी देनी होगी। शराब की एसेप्टिक ब्रिक पैकिंग अनिवार्य : देशी व आरएमएल शराब की कम से कम 3 प्रतिशत आपूर्ति एसेप्टिक ब्रिक पैक में पैकेजिंग की जाएगी। जरूरत पड़ने पर इसे 5 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकेगा। एसेप्टिक ब्रिक पैकिंग की शेल्फ लाइफ और ताजगी रहती है। बिना रेफ्रिजरेशन के भी उत्पाद 6 से 12 महीने तक ताजा रह सकते हैं। पैकेजिंग के दौरान उत्पाद और पैक दोनों को अलग-अलग रोगाणुरहित किया जाता है, इसलिए स्वाद और पोषण के लिए हानिकारक प्रिजर्वेटिव्स की आवश्यकता नहीं होती। इसका आयताकार आकार बहुत हल्का और सघन होता है, जिससे शिपिंग और भंडारण में जगह की बहुत बचत होती है और वितरण लागत कम आती है।

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