धमतरी में श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह संपन्न:मराठा पारा में पोथी यात्रा निकली, देवी भूमिका ने धर्मांतरण पर दिया बयान

छत्तीसगढ़ के धमतरी स्थित मराठा पारा में श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह का समापन हो गया। अंतिम दिन हवन-पूजन के बाद महाप्रसादी का वितरण किया गया और शाम को भव्य पोथी यात्रा निकाली गई। कथा वाचिका देवी भूमिका ने धर्मांतरण के विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि इसका विशेष कारण ‘विश्वास’ है। दरअसल, मराठा पारा वार्ड के लोगों ने अपने पूर्वजों की स्मृति में इस श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह का आयोजन किया था। इसमें धमतरी की कथा वाचिका देवी भूमिका ने श्रोताओं को कथा का श्रवण कराया। सप्ताह के अंतिम दिन सुबह से शाम तक विभिन्न धार्मिक आयोजन हुए। हवन-पूजन के पश्चात बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को महाप्रसादी वितरित की गई। श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह के संपन्न होने के बाद शाम को आयोजन स्थल से पोथी यात्रा निकाली गई। यह यात्रा पूरे वार्ड का भ्रमण करते हुए वापस कथा स्थल पर समाप्त हुई। पोथी यात्रा के दौरान जगह-जगह पुष्प वर्षा कर इसका स्वागत किया गया। कथा वाचिका देवी भूमिका ने धर्मांतरण के मुद्दे पर बात करते हुए कहा कि धर्मांतरण का विशेष कारण विश्वास की कमी है। जब इंसान को अपने धर्म पर विश्वास नहीं होता, तभी वह भटकता है। उन्होंने जोर दिया कि विश्वास की कमी के कारण ही धर्मांतरण बढ़ रहा है। श्वास के अभाव में धर्म से धर्म की ओर भटकाव उन्होंने आगे कहा कि जब तक लोग अपने धर्म के देवी-देवताओं के बारे में जानेंगे नहीं और उन पर विश्वास नहीं करेंगे, तब तक धर्मांतरण को रोकना मुश्किल है। विश्वास करना अत्यंत आवश्यक है। लोगों में आस्था, श्रद्धा और भक्ति तो है, लेकिन विश्वास की कमी है, जिसके कारण व्यक्ति एक धर्म से दूसरे धर्म में भटक रहा है। उन्होंने कहा कि लोगों में विश्वास जगाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। जहां भी श्रीमद् भागवत कथाएं हो रही हैं, वहां ठाकुर जी की महिमा का गुणगान किया जा रहा है ताकि लोग इससे जुड़ें और वे जुड़ भी रहे हैं। धर्म, परिवार और पुण्य प्राप्ति के उद्देश्य से भागवत कथा वार्ड वासियों ने यह भी बताया कि धर्म के लिए, परिवार के सहजनों के लिए तथा स्वर्गीय आत्मा की तृप्ति के लिए भागवत कथा का आयोजन किया गया था। उनका कहना है कि बड़े बुजुर्गों के अनुसार श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ कराने तथा उसका श्रवण करने से चार धाम की यात्रा पूर्ण हो जाती है। भागवत कथा को चार धाम यात्रा के बराबर माना जाता है।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *