सलूंबर जिले के ईडाणा गांव स्थित प्रसिद्ध ईडाणा माता मंदिर में इस वर्ष का पहला अग्नि स्नान एकादशी के अवसर पर प्रातःकाल संपन्न हुआ। इस दौरान मंदिर परिसर में हजारों श्रद्धालु मौजूद थे। यह शक्तिपीठ अपनी अनूठी परंपरा के लिए देशभर में विख्यात है। परंपरा के अनुसार जैसे ही माताजी पर भार आया, मंदिर में स्वतः अग्नि प्रज्वलित हो उठी और अग्नि स्नान की प्रक्रिया शुरू हुई। इस घटना को देखकर श्रद्धालुओं ने ‘जय ईडाणा माता’ के जयकारे लगाए। अग्नि स्नान के दौरान मंदिर में रखी अन्य सभी सामग्री जलकर भस्म हो गई। हालांकि माताजी की प्रतिमा और उनके आभूषणों को कोई क्षति नहीं पहुंची। श्रद्धालु इसे माताजी की महिमा और शक्ति का प्रमाण मानते हैं। स्थानीय रूप से ‘मेवल महारानी’ के नाम से प्रसिद्ध ईडाणा माता के दर्शन के लिए सलूंबर सहित आसपास के जिलों और दूर-दराज के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। उन्होंने इस विशेष अग्नि स्नान के दर्शन किए। ईडाणा माता मंदिर का यह अग्नि स्नान धार्मिक आस्था का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। यह मेवाड़ की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान का भी हिस्सा है। यह वार्षिक परंपरा श्रद्धालुओं के विश्वास को और मजबूत करती है।


