झाबुआ के एक स्कूल में आचार्य श्री धर्मबोधि सूरीश्वर जी महाराज साहेब ने नैतिक मूल्यों पर आधारित एक कार्यक्रम में विद्यार्थियों को संबोधित किया। यह कार्यक्रम विद्यालय के इतिहास में एक स्मरणीय अध्याय बन गया। इस अवसर पर युगप्रधान आचार्यसम पन्यास प्रवर श्री चंद्रशेखर विजय जी महाराज साहेब के शिष्यरत्न आचार्य भगवंत श्री धर्मबोधि सूरीश्वर जी महाराज साहेब का पावन सान्निध्य प्राप्त हुआ। आचार्य श्री ने विद्यार्थियों और विद्यालय परिवार को जीवन के वास्तविक मूल्यों, अनुशासन और सही आचरण का गहरा बोध कराया। उन्होंने अत्यंत सरल और प्रभावशाली ढंग से बच्चों को समझाया कि माता-पिता ही संसार में हमारे प्रथम भगवान हैं। उनके त्याग और संस्कारों की बदौलत ही मनुष्य का जीवन सही दिशा में अग्रसर होता है। आचार्य श्री ने शिक्षा के केंद्र को विद्या का मंदिर बताते हुए मर्यादा और पवित्रता पर बल दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि कक्षा में चप्पल पहनकर प्रवेश नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह स्थान ज्ञान अर्जन का पवित्र स्थल है। कार्यक्रम में एक प्रेरणादायी गीत के माध्यम से बच्चों को सत्कर्म, सकारात्मक सोच और अच्छे व्यवहार की शिक्षा दी गई, जिसे सभी विद्यार्थियों ने एकाग्रता के साथ आत्मसात किया। अपने संबोधन में आचार्य श्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे वे भी महत्वपूर्ण अवसरों पर अपनी माँ का आशीर्वाद लेना नहीं भूलते थे। यह दर्शाता है कि सफलता के शिखर पर पहुँचने के बाद भी माता-पिता का सम्मान ही सर्वोपरि रहता है। अंत में विद्यालय परिवार ने आचार्य श्री के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए संकल्प लिया कि संस्था सदैव शिक्षा के साथ संस्कारों और नैतिक मूल्यों को प्राथमिकता देती रहेगी।


