शहर से सटे मेनार के रामसर साइट घोषित होने की आस के बीच वन विभाग ने यहां पक्षियों की गणना कराई। यहां 160 से अधिक प्रजातियों के 15 हजार 400 से ज्यादा पक्षी दिखे। यह आंकड़ा पिछले साल की तुलना में करीब 5 हजार कम रहा। उस समय 20 हजार पक्षी आए थे। इसके पीछे आसपास के तालाबों में अब भी पानी भरा होने को कारण माना जा रहा है। मेनार में दो साल से एशियाई जलपक्षी गणना की जा रही है। यह कार्यक्रम वेटलैंड्स इंटरनेशनल की ओर से संचालित अंतरराष्ट्रीय जलपक्षी जनगणना का हिस्सा है। शुरुआत 1987 में भारतीय उपमहाद्वीप में हुई थी। उद्देश्य जलपक्षियों की आबादी और आर्द्रभूमि की स्थिति की निगरानी करना है। लोगों में जलपक्षियों और आर्द्रभूमियों के प्रति रुचि और संरक्षण को बढ़ावा देना भी है। बता दें कि उदयपुर शहर वेटलैंड सिटी और मेनार को रामसर का दर्जा देने का प्रस्ताव डेढ़ साल पहले 2023 में भेजा गया था। उदयपुर शहर को तो यूनेस्को के रामसर की ओर से इसी साल 24 जनवरी को वेटलैंड सिटी घोषित किया जा चुका, लेकिन मेनार का तगमा बाकी है। ये प्रजातियां नजर आईं इन टीमों ने की गणना एशियन वाटर बर्ड सेंसस-2025 के तहत यह गणना वेटलैंड्स इंटरनेशनल, बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी और वन विभाग की टीमों ने मिलकर की। दल ने ब्रह्म सागर, ढंढ तालाब, पुठियान एनीकट, नारायण देवी एनीकट और हिरोला तालाब का दौरा किया। टीम लीडर दर्शन मेनारिया ने बताया कि गणना जनवरी के अंतिम सप्ताह से शुरू की गई थी। टीम में धर्मेंद्र मेनारिया, हेमलता मेनारिया, हेमलता जोशी, कीर्ति मेनारिया और वन विभाग के नारायण रावत व भूपेंद्र देवड़ा भी थे।


