टीकमगढ़ के धजरई हनुमान मंदिर का 3 करोड़ से नवनिर्माण:महंत मदनमोहन दास ने किया भूमिपूजन, हनुमानगढ़ी अयोध्या की तर्ज पर स्थापित होंगी प्रतिमाएं

टीकमगढ़ के प्रसिद्ध धजरई हनुमान मंदिर का 3 करोड़ रुपए की लागत से नवनिर्माण किया जाएगा। गुरुवार को एकादशी के शुभ मुहूर्त पर वृंदावन धाम के धीर समीर आश्रम के महंत मदन मोहन दास महाराज ने विधि-विधान से नए मंदिर के निर्माण का भूमि पूजन किया। 10 लाख रुपए की सहयोग राशि दी इस अवसर पर महंत मदन मोहन दास महाराज ने मंदिर निर्माण के लिए 10 लाख रुपए की सहयोग राशि धजरई मंदिर के महंत बुंदेलखंड पीठाधीश्वर सीताराम दास महाराज को भेंट की। महंत सीताराम दास महाराज ने बताया कि मंदिर को 2028 तक तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। हनुमानगढ़ी अयोध्या की तर्ज पर स्थापित की जाएंगी प्रतिमाएं उन्होंने यह भी बताया कि नवनिर्माण के बाद मंदिर में हनुमानगढ़ी अयोध्या की तर्ज पर हनुमान जी महाराज की प्रतिमा के पीछे भगवान श्री राम, लक्ष्मण और माता जानकी की आशीर्वाद देती हुई प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी। बुंदेलखंड पीठाधीश्वर महंत सीताराम दास महाराज के अनुसार, प्रस्तावित मंदिर का निर्माण पारंपरिक शिल्प और आध्यात्मिक भावनाओं के अनुरूप होगा। मंदिर को तीन प्रमुख भागों में विकसित किया जाएगा। प्रवेश द्वार पर अर्ध मंडप बनेगा, जहां श्रद्धालु ध्यान और विश्राम कर सकेंगे। मुख्य मंडप में बैठ सकेंगे 200 श्रद्धालु इसके आगे विशाल मुख्य मंडप होगा, जिसमें लगभग 200 श्रद्धालु एक साथ बैठकर सुंदरकांड पाठ, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठान कर पाएंगे। इसके बाद गर्भगृह का निर्माण किया जाएगा, जहां श्री हनुमान जी महाराज के साथ भगवान श्री राम, लक्ष्मण और माता जानकी की भव्य प्रतिमाएं विराजमान होंगी। गर्भगृह के चारों ओर परिक्रमा पथ बनाया जाएगा, जिसमें भगवान शिव और माता दुर्गा की प्रतिमाएं भी स्थापित की जाएंगी। मंदिर के इतिहास की दी जानकारी महंत सीताराम दास महाराज ने मंदिर के इतिहास के बारे में बताया कि वर्ष 1970 के आसपास तपस्वी संत धूलिया महाराज धजरई तिगेला पहुंचे थे। उन्होंने झाड़ियों में छिपकर तीन दिन तक निराहार रहकर हवन-पूजन किया और हवन की भस्म को जल में घोलकर उसका सेवन किया था। गांववासियों के आग्रह पर उन्होंने अन्न ग्रहण किया और वहीं विराजने की स्वीकृति दी। ग्रामीणों ने एक एकड़ भूमि की व्यवस्था की, जिसके बाद धूलिया बाबा और पाल बाबा ने लोगों से 5-5 पैसे एकत्र कर कुआं खुदवाया और एक छोटा मंदिर बनवाकर श्री हनुमान जी को विराजमान किया।

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