वित्तीय अनियमितता पर सहायक ग्रेड-03 निलंबित:बलरामपुर DEO ने की कार्रवाई, जांच समिति भी गठित

बलरामपुर-रामानुजगंज जिला शिक्षा अधिकारी ने शिक्षा विभाग में अनुशासन और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए दो अलग-अलग मामलों में प्रशासनिक कार्रवाई की है। इनमें एक सहायक ग्रेड-03 को वित्तीय अनियमितता के आरोप में निलंबित किया गया है, जबकि एक लेखापाल के खिलाफ अवैध वसूली की शिकायत पर जांच समिति गठित की गई है। रिश्वत मांगने का आरोप पहला मामला लेखापाल राजेश मिश्रा से संबंधित है, जो विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय वाड्रफनगर में पदस्थ हैं। उन पर सहायक शिक्षक विज्ञान (प्रयोगशाला) शिवा यादव से परिवीक्षा अवधि समाप्ति प्रस्ताव भेजने के बदले अवैध धनराशि मांगने की शिकायत कलेक्टर जनदर्शन में की गई थी। कलेक्टर के निर्देश पर शिकायत की प्रारंभिक जांच में यह कृत्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-3 का उल्लंघन पाया गया। इसे गंभीर मानते हुए तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया है। समिति में सहायक संचालक (योजना) आशारानी टोप्पो अध्यक्ष, विकासखंड शिक्षा अधिकारी रामचन्द्रपुर विजय कुशवाहा और प्राचार्य शासकीय माध्यमिक विद्यालय जामवन्तपुर फुलमनी एक्का सदस्य हैं। 15 दिन के अंदर मांगी रिपोर्ट समिति को 15 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए राजेश मिश्रा को शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय तातापानी, बलरामपुर में संलग्न किया गया है। इसे दंडात्मक नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था बताया गया है। दूसरा मामला शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कुन्दीकला, राजपुर में पदस्थ सहायक ग्रेड-03 बृजकिशोर बुनकर से जुड़ा है। उन पर गंभीर वित्तीय अनियमितता का आरोप है। आरोप है कि उन्होंने सेवानिवृत्त प्रधान पाठक सुधीर कुमार तिवारी की पुनर्नियुक्ति अवधि के वेतन भुगतान के लिए वास्तविक देय राशि ₹5,84,000 के स्थान पर ₹58,40,000 का देयक तैयार कर जिला कोषालय में प्रस्तुत किया। प्रारंभिक जांच में उनकी भूमिका प्रथम दृष्टया प्रमाणित पाई गई है। शंकरगढ़ ऑफिस में ट्रांसफर इस गंभीर प्रकरण को देखते हुए बृजकिशोर बुनकर को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के नियम-9(1)(क) के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय शंकरगढ़ निर्धारित किया गया है और उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा। जिला शिक्षा अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि इन दोनों मामलों में की गई कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।

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