हर्षोलाव तालाब पर अदालत का बड़ा आदेश:किसी भी तरह के अतिक्रमण को रोकना होगा, तहसीलदार को किया पाबंद

बीकानेर शहर में स्थित ऐतिहासिक अमरेश्वर हर्ष महादेव मंदिर परिसर में स्थित हर्षोलाव तालाब की आगोर भूमि को लेकर अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश संख्या-3 बीकानेर ने तालाब की आगोर भूमि पर किसी भी तरह के अवैध निर्माण और अतिक्रमण पर रोक लगाने के अंतरिम आदेश को जारी रखा है। 172 बीघा आगोर भूमि पर निर्माण-अतिक्रमण नहीं अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि खसरा नंबर 152 की कुल 172 बीघा आगोर भूमि, जो वर्षों से हर्षोलाव तालाब की जल आवक के रूप में दर्ज है, उस पर किसी भी प्रकार का निर्माण, पुनर्निर्माण या अतिक्रमण नहीं किया जा सकता। यदि मौके पर कोई अवैध निर्माण कार्य होता है, तो उसे तुरंत रुकवाने के निर्देश दिए गए हैं। नगर निगम, तहसीलदार और बीडीए पर जिम्मेदारी अदालत ने तहसीलदार बीकानेर, जिला कलेक्टर के माध्यम से राज्य सरकार, नगर निगम बीकानेर और बीकानेर विकास प्राधिकरण को आदेश की पालना के लिए बाध्य किया है। कोर्ट ने माना कि आगोर भूमि का संरक्षण न केवल पर्यावरणीय दृष्टि से जरूरी है, बल्कि यह जनहित और जल संरक्षण से भी सीधे जुड़ा हुआ है। पर्यावरण और जनहित को माना प्राथमिक आदेश में कहा गया है कि तालाब की आगोर भूमि का उपयोग वर्षा जल के संग्रह, पशुओं के लिए पानी और धार्मिक परंपराओं से जुड़ा हुआ है। ऐसे में आगोर क्षेत्र में अतिक्रमण से अपूरणीय क्षति हो सकती है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है। इसी आधार पर अदालत ने यथास्थिति बनाए रखने को जरूरी माना। 2020 से लंबित है मामला यह प्रकरण वर्ष 2020 से न्यायालय में विचाराधीन है। इससे पहले 8 जनवरी 2020 को भी अदालत ने अंतरिम निषेधाज्ञा जारी की थी, जिसे अब 27 जनवरी 2026 के आदेश के तहत मुख्य प्रकरण के अंतिम निस्तारण तक बढ़ा दिया गया है। अदालत का स्पष्ट निर्देश अदालत ने स्पष्ट किया है कि हरषोलाव तालाब की आगोर भूमि को उसके मूल स्वरूप में बनाए रखना होगा और किसी भी प्रकार की अनुमति, पट्टा या निर्माण स्वीकृति अवैध मानी जाएगी। सभी पक्षकारों को अपने-अपने खर्च स्वयं वहन करने होंगे। ट्रस्ट के सदस्यों ने दायर किया वाद ये वाद साल 2020 में अमरेश्वर हर्ष जातीय ट्रस्ट मंडल से जुड़े पदाधिकारियों ने व्यक्तिगत तौर पर अदालत में दायर किया। जिसमें सीनियर एडवोकेट प्रेम नारायण हर्ष, नन्द लाल हर्ष, मुकुंद नारायण हर्ष और नरपत सेठिया ने दायर किया था। बाद में इसी मामले में शिवलाल हर्ष, अनन्त कुमार हर्ष, गोपाल दास हर्ष और आनन्द कुमार हर्ष भी वादी के तौर पर जुड़े। इनमें तत्कालीन सचिव नन्दलाल हर्ष और मुकुंद नारायण हर्ष का निधन हो चुका है।

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