राजस्थान की कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा (23) की जोधपुर में बुधवार को मौत हो गई। गुरुवार को पोस्टमॉर्टम के दौरान विवाद हो गया था। शाम करीब 6:30 बजे उनका शव बालोतरा जिले के परेऊ गांव में पहुंचा। शुक्रवार को परेऊ गांव में साध्वी का अंतिम संस्कार होगा। लेकिन, बालोतरा जिले के परेऊ गांव की प्रेम बाईसा के आध्यात्मिक सफर की ये कहानी काफी रोचक है। प्रेम बाईसा 5 साल की थीं तभी उनकी मां की मौत हो गई, पिता ने संभाला। जोधपुर के जिस आश्रम में रहे, वहां संतों के साथ रहकर भजन और कथा सीखी और महज 12 साल की उम्र में जोधपुर के पास कथा की। आसपास के लोगों में उनके प्रति काफी श्रद्धाभाव भी था। दो दिन पहले 27 जनवरी को वे अजमेर से कथा कर जोधपुर लौटी थीं। पढि़ए कैसे ट्रक ड्राइवर की बेटी बनी साध्वी प्रेम बाईसा…. स्थानीय लोगों के अनसुार साध्वी प्रेम बाईसा के पिता वीरमनाथ ट्रक ड्राइवर थे। उनकी मां अमरू बाईसा भगवान की भक्ति में लगी रहती थीं। स्थानीय लोग बताते है कि अमरू बाईसा ने मौत से एक साल पहले नवरात्रि के व्रत रखे थे। ये बात प्रेम बाईसा के पिता को पता नहीं थी। जब वे घर आए तो उन्होंने इस बात के लिए अमरू बाईसा को टोका और कहा- मुझे कहते तो मैं भी व्रत रखता। इस बीच दोनों ने तय किया कि वे दोनों मिलकर चौमासा व्रत यानी चार महीने का व्रत रखेंगे। इस दौरान वे अन्न भी ग्रहण नहीं करेंगे। एक महीने तक कुछ नहीं खाया, भाइयों ने दबाव बनाया तो घर छोड़ा
परेऊ गांव के लोग बताते है कि उस समय प्रेम बाईसा की उम्र करीब चार साल थी। मां-पिता को भक्ति में डूबा देख बेटी भी भक्ति-भाव में लगी रहती थी। चौमासे व्रत के एक महीने और चार दिन पूरे हो चुके थे। दोनों पति-पत्नी ने अन्न तक ग्रहण नहीं किया। जब ये बात वीरमनाथ के भाइयों को पता चली तो उन्होंने दोनों को व्रत खोलने के लिए कहा। परिवार बार-बार व्रत खोलने के लिए कह रहा था लेकिन पति-पत्नी नहीं मान रहे थे। आखिर में इस प्रेशर से परेशान पति-पत्नी प्रेम बाईसा को लेकर घर छोड़ दिया और जोधपुर आ गए। पूरा परिवार आश्रम में रहने लगा, वहीं हुई मां की मौत वीरमाराम अपने परिवार के साथ जोधपुर में गुरुकृपा आश्रम में आ गए। अब वे अपने परिवार के साथ यहीं पर रहने लगे। मां की भक्ति और संतों के साथ रहते-रहते प्रेम बाईसा भी भक्ति-भाव में डूबने लगीं। इस बीच प्रेम बाईसा के मां की मौत हो गई। तब प्रेम बाईसा महज 5 साल की थीं। इसके बाद प्रेम बाईसा ने आश्रम के संत राजाराम जी और संत कृपाराम जी महाराज की शरण में आकर कथा वाचन और भजन गायन के साथ आध्यात्मिक शिक्षा ली। वह संतों के साथ कथाओं में जाने लगीं और भजन भी गातीं। महज 12 साल की उम्र में उन्होंने जोधपुर के पास अपनी पहली कथा की थी। इसके बाद आस-पास के लोगों में उनके प्रति श्रद्धा-भाव धीरे-धीरे बढ़ने लगा। पुश्तैनी जमीन में बना आश्रम सरपंच बांकाराम का कहना है कि वीरमनाथ और उनकी बेटी प्रेम बाईसा ने परेऊ गांव की पुश्तैनी जमीन पर आश्रम बना दिया। बीच-बीच में यहां पर आकर रहते थे। लेकिन बीते दो सालों से यहां पर नहीं आए थे। यहां पर कोई नहीं रहता है। साध्वी प्रेम बाईसा के बचपन में कथा और भजन गायक की रुचि ने उनकी लोकप्रियता को बढ़ा दिया। फिर प्रेम बाईसा ने जोधपुर में अपना अलग से आश्रम बना दिया। उनके समर्थक और भक्त इससे जुड़ते गए। स्थानीय लोगों ने बताया- गांव में वीरमनाथ के दो छोटे भाई हैं। जो यहां पर अपने परिवार के साथ रहते हैं। साध्वी की मौत के बाद से विवाद, भक्तों ने पिता पर लगाए आरोप साध्वी की मौत के बाद से विवाद बढ़ता जा रहा है। एक भक्त रुद्रप्रताप सिंह ने बताया कि रात 9:30 बजे के करीब वो आरती नगर स्थित साध्वी के आश्रम पहुंचे थे। वहां उस समय साध्वी के पिता बॉडी को लेकर बाहर खड़े थे। बॉडी को अंदर ले जाने से मना कर रहे थे। इतना ही नहीं साध्वी के फोन को भी पुलिस को देने से मना कर दिया था। हालांकि, बाद में ACP छवि शर्मा ने उनके मोबाइल को अपने कब्जे में ले लिया था। रुद्रप्रताप सिंह ने बताया कि बॉडी को मॉर्च्युरी में ले जाने के लिए रवाना हुए तो पिता ने अपने निजी वाहन से उतरकर भागने की कोशिश भी की थी। बाद में ACP ने उन्हें समझाया और खुद एसीपी छवि शर्मा उसी गाड़ी में बैठीं जिसमें बॉडी थी। इसके बाद गाड़ी MGH मॉर्च्युरी के लिए रवाना हुई। कथावाचक की तबीयत 2 दिन से खराब थी एसीपी(वेस्ट) छवि शर्मा ने बताया कि परिजनों की ओर से दी गई रिपोर्ट के मुताबिक, साध्वी की तबीयत पिछले दो दिनों से नासाज थी। बुधवार को उन्होंने किसी से एक इंजेक्शन लगवाया था। इंजेक्शन लगने के तुरंत बाद उनकी तबीयत अचानक और ज्यादा बिगड़ गई। परिजन उन्हें लेकर पाल रोड स्थित एक प्राइवेट हॉस्पिटल (प्रेक्षा हॉस्पिटल) पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद शव को एमजीएच मॉर्च्युरी में लाया गया। साध्वी प्रेम बाईसा से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… राजस्थान- कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की मौत के बाद हंगामा-तनाव:पिता का दावा- इंजेक्शन के कारण जान गई; कल होगा अंतिम संस्कार राजस्थान- कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की मौत सुसाइड या हादसा?:6 महीने पुराने ब्लैकमेलिंग केस की चर्चा, अपने ही निजी स्टाफ पर लगाए थे आरोप कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की मौत:निधन के 4 घंटे बाद कथित सुसाइड नोट पोस्ट; लिखा-मैं इस दुनिया से हमेशा के लिए अलविदा


