सीकर में CITU की आक्रोश रैली:बोले-आंगनबाड़ी कर्मचारियों को मिले सरकारी कर्मचारी का दर्जा, देश में ठेका प्रथा बंद हो

मार्क्स वादी कम्युनिस्ट पार्टी के संगठन भारतीय ट्रेड यूनियन केंद्र (सीटू) की ओर से आज सीकर में मजदूरों के वेतन बढ़ोतरी सहित अन्य मांगों को लेकर आक्रोश रैली निकाली गई। रैली ढाका भवन से शुरू होकर शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए कलेक्ट्रेट पहुंची। इसके बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रदेश के मुख्यमंत्री भजनलाल सरकार के नाम कलेक्टर मुकुल शर्मा को ज्ञापन सौंपा गया। सीटू के जिला महासचिव बृजसुंदर जांगिड़ ने बताया- हाल में केंद्र सरकार की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जो बजट जारी किया,उसमें मजदूरों के लिए कोई भी बढ़ोतरी न्यूनतम वेतन में नहीं की गई है। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को निजी हाथों में देने का प्रस्ताव बनाया गया है। भारतीय जीवन बीमा निगम जैसे प्रतिष्ठित निगम में 100% विदेशी निवेश का प्रस्ताव बनाया गया है। जिसका देश की जनता में गलत संदेश गया है। वहीं संविदाकर्मी और आंगनवाड़ीकर्मी, आशाकर्मी के मानदेय में कोई भी बढ़ोतरी नहीं की गई है। राजस्थान की मौजूदा सरकार ने भी अपनी पिछले बजट में इस संबंध में कोई घोषणा नहीं की थी। राजस्थान में ही आंगनवाड़ीकर्मियों को हिंदुस्तान में सबसे कम मानदेय मिलता है। ऐसे में हमारी मांग है कि जो न्यूनतम मानदेय श्रम सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में तय हो चुका है। वह 26 हजार रुपए न्यूनतम वेतन दिया जाए। इसके साथ ही आंगनवाड़ीकर्मियों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। ठेका प्रथा बंद की जाए और देश के सार्वजनिक उपक्रमों का निजीकरण भी बंद हो।

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