उपचार के लिए प्रयोगशाला जांच की सार्थकता पर डाक्टर्स के व्याख्यान, स्टूडेंट्स के सवालों के जवाब भी सरल तरीके से दिए

टोंक| यूनानी मेडिकल कॉलेज में गुरुवार को “बेसिक इन्वेस्टिगेशन इंटरप्रिटेशन, क्लीनिकल इंपोर्टेंस एंड यूज इन मेडिकल प्रैक्टिस” विषय पर एक दिवसीय सेमिनार हुई। यह कार्यक्रम मानव संसाधन विकास केंद्र के संयोजन से आयोजित इस सेमिनार का मुख्य उद्देश्य यूनानी चिकित्सा के छात्रों एवं डॉक्टर्स को मूलभूत प्रयोगशाला जांचों की व्याख्या, उनके नैदानिक महत्व तथा चिकित्सा अभ्यास में उपयोगिता के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम ने क्लिनिकल डायग्नोस्टिक और लेबोरेटरी मेडिसिन के क्षेत्र में व्यावहारिक कौशल विकास पर जोर दिया। मुख्य वक्ता राजकीय जिला चिकित्सालय के पैथोलॉजिस्ट एवं प्रयोगशाला प्रभारी डॉ. वसीम अकरम अंसारी ने व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने रक्त, मूत्र एवं अन्य बुनियादी जांचों की उपयोगिता पर प्रकाश डाला तथा बताया कि ये जांचें रोग निदान, रोग की गंभीरता आकलन तथा उपचार की निगरानी में कैसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। स्लाइड्स के माध्यम से विद्यार्थियों से प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किए तथा व्यावहारिक समस्याओं पर चर्चा की। छात्रों ने भी प्रश्न पूछे, जिनके उत्तर सरल एवं वैज्ञानिक तरीके से दिए। एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मोहम्मद अकमल ने आधुनिक चिकित्सा में प्रयोगशाला जांचें रोग पहचान, अवस्था निर्धारण एवं उपचार दिशा तय करने में अपरिहार्य हैं। कॉलेज प्राचार्य डॉ. मोहम्मद इरशाद खान एवं उप-प्राचार्य डॉ. नाजिया शमशाद ने संदेश में ऐसे शैक्षणिक आयोजनों की सराहना की तथा कहा कि ये कार्यक्रम छात्रों की अकादमिक एवं व्यावहारिक क्षमता विकास में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। कार्यक्रम का संचालन एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सरफराज अहमद ने किया। सेमिनार में डॉ. मुश्ताक अहमद, डॉ. जोहरा जबीं, डॉ. राशिद अली खान, डॉ. मरगूब अहमद, डॉ. आयशा आदि भी मौजूद रहे।

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