जयपुर में गोपालपुरा बाइपास पर संचालित होटल, कोचिंग सेंटर, लाइब्रेरी समेत अन्य अधिकांश गतिविधियां जेडीए और नगर निगम के नियमों के मुताबिक अवैध है। क्योंकि जिन प्लॉट्स पर इनका संचालन हो रहा है, उनका न तो लैंड यूज निर्धारण है और न ही उनके पट्टे जेडीए या नगर निगम ने अब तक जारी किए है। इस रोड पर सबसे ज्यादा इंस्टीट्यूशन गतिविधियां (स्कूल, कॉलेज, कोचिंग सेंटर, लाइब्रेरी) इत्यादि संचालित है, जिनको शिफ्ट करने के उदेश्य से ही प्रताप नगर हल्दीघाटी मार्ग पर कोचिंग हब बनाया गया था। जेडीए ने जब साल 2017 के आखिरी में (सितंबर-अक्टूबर) में सड़क की चौड़ाई 160 फीट करने के लिए यहां से बड़ी संख्या में निर्माण तोड़े थे। लेकिन बाद साल 2018 में यहां वापस बड़ी संख्या में निर्माण हो गए, जिनमें ये गतिविधियां (कोचिंग, लाइब्रेरी, होटल इत्यादि) शुरू हो गई। तब जेडीए ने इस रोड के लैंड यूज (कॉमर्शियल अथवा इंस्टीट्यूशन या मिक्स) निर्धारण की प्लानिंग की, लेकिन कोई निर्णय नहीं हो सका। 702 निर्माण चिह्नित, जिन्हें माना अवैध जेडीए ने साल 2018 में ही एक सर्वे करवाया था, जिसमें 702 निर्माण ऐसे चिह्नित किए गए, जिनमें संचालित गतिविधियों (स्कूल, कॉलेज, कोचिंग सेंटर, लाइब्रेरी, दुकान, नर्सिंग होम इत्यादि) को अवैध माना। हालांकि यहां सबसे ज्यादा संचालन इंस्टीट्यशन है, जिसे शिफ्ट करने के लिए हाउसिंग बोर्ड के जरिए सरकार ने कोचिंग हब का निर्माण करवाया, लेकिन तब भी ये कोचिंग संचालक यहां से शिफ्ट नहीं हुए। हाउसिंग बोर्ड ने भी निकाला था नोटिस हाउसिंग बोर्ड प्रशासन ने भी पिछली गहलोत सरकार के समय एक सार्वजनिक नोटिस निकालकर इन कोचिंग सेंटर्स को यहां से संस्थान खाली करके कोचिंग हब शिफ्ट होने की चेतावनी दी थी। हालांकि उस समय न तो नगर निगम ग्रेटर प्रशासन ने इन पर कार्यवाही की और न ही जेडीए ने इन संस्थाओं पर कोई एक्शन लिया। मानसून में नगर निगम ने जारी किए थे नोटिस इससे पहले इसी साल मानसून सीजन में नगर निगम ग्रेटर ने यहां संचालित कई कोचिंग संचालकों को नोटिस जारी किए थे। इस दौरान कुछ कोचिंग सेंटर्स पर सीलिंग की कार्यवाही भी की थी। तब नगर निगम ग्रेटर ने ये कार्यवाही दिल्ली के एक कोचिंग सेंटर में पानी भरने की हुई घटना को देखते हुए की थी।


