जालोर में ग्रेनाइट एसोसिएशन के चुनाव के बाद शुरू हुआ विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। गुरुवार शाम एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष ने कलेक्टर से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा और आरोप लगाया कि एसोसिएशन के नाम पर ट्रक ड्राइवरों और लघु उद्योगों से अवैध वसूली की जा रही है। पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि वसूली के लिए लगाए गए लोग ट्रक रोककर मारपीट पर उतर आते हैं और कानून हाथ में ले रहे हैं। कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, अवैध वसूली रोकने की मांग
पूर्व अध्यक्ष ने ज्ञापन में कहा कि ग्रेनाइट एसोसिएशन द्वारा की जा रही अवैध वसूली को तुरंत बंद कराया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने समय रहते व्यवस्था नहीं संभाली, तो हालात और बिगड़ सकते हैं। नॉन ट्रेडिंग कम्पनी एक्ट का हवाला
ज्ञापन में बताया गया कि ग्रेनाइट एसोसिएशन राजस्थान नॉन ट्रेडिंग कम्पनी एक्ट 1960 के तहत पंजीकृत है। इस स्थिति में एसोसिएशन केवल सदस्यों से डोनेशन ले सकती है, वह भी खाते में। नकद राशि एक साल में केवल 2000 रुपये तक ली जा सकती है। इसके बावजूद ट्रक ड्राइवरों और लघु उद्योगों से वसूली की जा रही है। पर्यावरण और विकास शुल्क के नाम पर वसूली का आरोप
पूर्व अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि ग्रेनाइट एसोसिएशन पर्यावरण और विकास शुल्क के नाम पर भी अवैध वसूली कर रही है। जबकि पिछले चार साल में पर्यावरण से जुड़ा कोई काम नहीं किया गया है। विकास समिति के जरिये भी वसूली का आरोप
ज्ञापन में यह भी बताया गया कि ग्रेनाइट एसोसिएशन विकास समिति नाम से एक अलग संस्था बनाई गई है, जो सहकारी एक्ट में पंजीकृत है। इस समिति के माध्यम से भी अवैध वसूली की जा रही है। स्लरी ट्रकों को रोकने का मामला उठाया
पूर्व अध्यक्ष ने बताया कि जालोर के ग्रेनाइट क्षेत्र में स्लरी भरकर जा रहे ट्रकों को भी वसूली के लिए रोका जा रहा है। स्लरी उद्योगों का सह उत्पाद है, जिसे बेचने का अधिकार फैक्ट्री मालिकों को है और वे विधिवत बिल काटकर बिक्री कर रहे हैं।
ज्ञापन सौंपने के दौरान भवानीसिंह धाधिया, लालसिंह राठौड़, राजवीरसिंह देवड़ा और रतनसिंह कानीवाडा सहित कई उद्यमी मौजूद रहे। सभी ने ग्रेनाइट एसोसिएशन की कथित अवैध वसूली पर कार्रवाई की मांग की।


