कला शिक्षकों के पद स्वीकृत कर कला शिक्षकों की भर्ती करने के लिए सोमवार को जिला मुख्यालय पर घंटाघर के पास कलाकारों ने अनूठा प्रर्दशन किया। पांच मीटर कैनवास के बैनर बनाए, राजस्थानी चित्र संगीत नृत्य, वाध्ययंत्रों से शांतिपूर्वक दो घंटा तक धरना-प्रर्दशन किया। प्रर्दशन में जिले के सैकड़ों कला शिक्षक अभ्यर्थी और शिक्षा विद्वान शामिल हुए। बाद में मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री के नाम ADM को ज्ञापन भेजा। यह प्रदर्शन दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक चला। कलाकर महेश गुर्जर ने राजस्थानी पोशाक में नृत्य भी किया। घंटाघर से गुजरते लोग इनके अनूठे अंदाज के प्रदर्शन को देखते हुए निकले। इस दौरान जिले के कलाकार वरिष्ठ कलाकार डॉ. हनुमान सिंह खरेडा, शाहिद नकवी, शिक्षा विद्वान रमेश काला, राजेश शर्मा, चित्रकार पुरूषोत्तम सोनी, नरेन्द्र साहू, गुरूदयाल कुमावत, उमेश साहू, जितेन्द्र रघुवंशी, शिप्रा सक्सेना, पूनम डिग्रवाल, शाईस्ता खान, मुन्ना भाई तबला वादक, भवाई नृत्य कलाकार अशोक पहाड़िया, संजय कुमार बारेठ, अबरार अहमद, जितेन्द्र सैनी, प्रदीप कुमार जोनवाल, परसराम मीणा, नित्यानंद महावर समेत सैकड़ों कला शिक्षा के बेरोजगार अभ्यर्थी मौजूद रहे। यह है कला शिक्षक अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगे 5000 आर्ट रूम को आज भी कला शिक्षकों इंतजार प्रदेश में कला शिक्षा के शिक्षण के लिए केंद्र सरकार ने आर्ट एण्ड क्राफ्ट बनाने के लिए राजस्थान सरकार शिक्षा विभाग को करोड़ों का बजट भेजकर लगभग 5000 आर्ट एण्ड क्राफ्ट तैयार कराए है ताकि बच्चों को कलाओं की शिक्षा उन आर्ट एण्ड क्राफ्ट रूम में मिले। आज वह आर्ट एण्ड क्राफ्ट रूम किसी अन्य कार्य में काम आ रहे है। बिना कला शिक्षकों के बिना उनकी उपयोगिता नज़र नहीं आ रही है । स्कूलों में पढ़ाई नहीं फिर भी 100 अंकों का मूल्यांकन राजकीय विद्यालयों में भले ही कला शिक्षकों के पद सृजित भर्ती या नियुक्ति नहीं है और नआ कला शिक्षा की पुस्तक है, स्कूलों में पढ़ाई भी नहीं होती है। इसके बावजूद शिक्षा विभाग ने प्रायोगिक और सैद्धांतिक के लिए 100 अंकों का मूल्यांकन होता है। फर्जी तरीके से अंक तालिका में ग्रेड जारी होती है। मजबूरी में स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों को यह मूल्यांकन करना पड़ता है। कलाकार महेश गुर्जर ने बताया कि कला विशेषज्ञों की कमेटी कला शिक्षकों के पद सृजित कर भर्ती करने की अनुशंसा कर चुकी है,लेकिन सरकार ने अभी तक ऐसा नहीं किया है।


