चंडीगढ़ में फर्जी ट्रैफिक चालान के नाम पर लोगों से ठगी करने वाले एक बड़े साइबर नेटवर्क का खुलासा हुआ है। इस गिरोह का लिंक पाकिस्तान में बैठे साइबर ठगों से जुड़ा बताया जा रहा है। चंडीगढ़ साइबर सेल ने उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के रहने वाले शैलेंद्र कुमार और महेंद्र सिंह को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपियों से पुलिस पूछताछ में कई अहम खुलासे हुए हैं। फर्जी लिंक के जरिए साइबर ठगी पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे केवल दसवीं पास हैं। पढ़ाई पूरी नहीं हो पाई और नौकरी की काफी तलाश की, लेकिन कहीं काम नहीं मिला। इसी दौरान उनके मोबाइल फोन पर व्हाट्सएप के जरिए एक मैसेज आया, जिसमें एक लिंक भेजा गया था। मैसेज में लिखा था कि अगर पैसे कमाने हैं तो लिंक डाउनलोड करें और हर मैसेज भेजने पर 15 पैसे मिलेंगे। आर्थिक तंगी के चलते दोनों ने लिंक डाउनलोड कर लिया और ठगी के इस नेटवर्क से जुड़ गए। आरोपियों ने बताया कि वे लोगों के मोबाइल नंबरों पर फर्जी ट्रैफिक चालान के मैसेज भेजते थे। मैसेज में चालान भरने के लिए एक लिंक होता था। जैसे ही लोग लिंक खोलते थे, उनसे ठगी हो जाती थी। उन्हें हर एक मैसेज भेजने के बदले 15 पैसे मिलते थे। करीब 4 महीने पहले उन्होंने यह काम शुरू किया था और रोजाना सैकड़ों मैसेज भेज रहे थे। ओपन सोर्स से जुटाते मोबाइल नंबर पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने बताया कि मोबाइल नंबर उन्हें ओपन सोर्स से मिल जाते थे। ई-मेल, फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कई लोगों के मोबाइल नंबर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होते हैं, वहीं से वे नंबर इकट्ठा करते थे। मामला तब सामने आया जब आरोपियों ने गलती से चंडीगढ़ के एक डीएसपी को फर्जी ट्रैफिक चालान का मैसेज भेज दिया। डीएसपी ने तुरंत अपने ड्राइवर को बुलाकर चालान की जानकारी ली। जांच में पता चला कि कोई भी चालान पेंडिंग नहीं था। इसके बाद डीएसपी ने मामले की शिकायत चंडीगढ़ साइबर सेल में दी। शिकायत के बाद केस दर्ज कर चंडीगढ़ साइबर सेल की इंचार्ज इरम रिजवी की अगुवाई में टीम ने जांच शुरू की। आरोपियों को ट्रेस कर उत्तर प्रदेश के बांदा से गिरफ्तार कर लिया गया। इस पूरे मामले की सुपरविजन डीएसपी वेंकटेश कर रहे हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क से और कितने लोग जुड़े हैं और पाकिस्तान में बैठे मास्टरमाइंड कौन हैं।


