धरमपुर वन परिक्षेत्र के नयागांव स्थित पझरियन माता मंदिर परिसर में दो दिवसीय ‘अनुभूति नेचर कैंप’ का शुभारंभ शुक्रवार को हुआ। यह शिविर पूरी तरह से ‘नो प्लास्टिक’ और ‘इको-फ्रेंडली’ अवधारणा पर आधारित था, जिसका मुख्य उद्देश्य स्कूली बच्चों को प्रकृति और वन्यजीवों के बारे में व्यावहारिक शिक्षा प्रदान करना है। कैंप में धरमपुर हायर सेकेंडरी, नयागांव और शहपुरा स्कूलों के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत जंगल दर्शन से हुई, जहां बच्चों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली को करीब से देखा। नेचर ट्रेनर मनीष रावत ने विद्यार्थियों को कई वृक्षों की प्रजातियों की पहचान कराई और उनकी औषधीय व पर्यावरणीय उपयोगिता समझाई। शिविर के दौरान बच्चों को नर और मादा जीवों में शारीरिक अंतर की पहचान, जंगल में मौजूद प्राकृतिक औषधियों की जानकारी दी गई। जल संरक्षण और पौधरोपण के महत्व को सरल मॉडल के जरिए समझाया गया। वन विभाग द्वारा तैयार किया गया विशेष सेल्फी पॉइंट भी बच्चों के आकर्षण का केंद्र रहा। वन परिक्षेत्र अधिकारी वैभव सिंह चंदेल ने कहा कि प्रकृति से जुड़ाव ही भविष्य को सुरक्षित रख सकता है। इस अवसर पर अजयगढ़ रेंजर पंकज दुबे, प्रशिक्षु रेंजर ओंकार नाथ मिश्रा सहित कई जनप्रतिनिधि और समाजसेवी उपस्थित रहे। उन्होंने इस आयोजन को ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायी बताया। इस कैंप ने बच्चों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता विकसित करने में भूमिका निभाई। समाजसेवी रजऊ राजा, सरपंच कौशल किशोर लोध, महेंद्र सिंह, मनोज सिंह सहित वन विभाग का समस्त अमला (डिप्टी रेंजर सुंदर लाल प्रजापति, अंजनी दीक्षित, उमग खरे व अन्य) भी सक्रिय रूप से मौजूद रहा। अनुभूति कैंप की अन्य तस्वीरें…


