सरकारी सिस्टम कैसे अच्छी योजनाओं व उनके बजट को बर्बाद करता है, इसका उदाहरण है राजस्थान की कालीबाई भील व देवनारायण स्कूटी योजना। 385 करोड़ का कबाड़ा हो रहा है। 185 करोड़ की स्कूटियां बांटी नहीं और फिर 200 करोड़ की खरीद की तैयारी है। सरकारें करोड़ों रुपए खर्च कर बेटियों के लिए स्कूटी खरीदती तो हैं, मगर उन्हें देती नहीं। सत्र 2021 से 2023 तक 13 हजार छात्राओं को और 2023-24 की 16 हजार छात्राओं को स्कूटी नहीं दी गई। ये 185 करोड़ की स्कूटी कॉलेजों में कबाड़ हो रही हैं। उच्च शिक्षा विभाग फिर 2024-25 में 200 करोड़ से ज्यादा की 30 हजार स्कूटी खरीदने की तैयारी में है। खरीदते हैं तो बांटते क्यों नहीं? वजह बताई है- वेंडर ने स्कूटी देरी से दीं। अकाउंट्स सेक्शन ने 3.70 करोड़ की पेनल्टी लगाने का सुझाव दिया। विभाग 3 साल में फैसला नहीं कर पाया कि पेनल्टी लगाकर स्कूटी लेनी है या वेंडर को लौटानी हैं। भास्कर सवाल डिप्टी सीएम, उच्च शिक्षा मंत्री प्रेमचंद बैरवा पिछली सरकार में स्कूटी योजना के तहत वेंडर ने टेंडर की शर्तों के अनुसार सप्लाई देने की समय सीमा में स्कूटी की सप्लाई नहीं दी थी। वेंडर को एक्सटेंशन भी नहीं दिया गया था। अब वेंडर को एक्सटेंशन कर बच्चियों को स्कूटी देने पर विचार कर रहे हैं। कॉलेज एजु. आयुक्त ओमप्रकाश बैरवा सभी स्कूटी कॉलेजों मेंं खड़ी हैं, सप्लाई की डेडलाइन 3 बार बढ़ाने पर भी वेंडर ने देरी से दी, इसलिए हमने रिसीव नहीं की हैं। नए टेंडर में पुरानी स्कूटी के वितरण की सोच रहे हैं। नए सत्र में छात्राओं की पात्रता के मुताबिक स्कूटी देने के लिए खरीदनी ही पड़ती हैं।


