अफसरों की टीम ने 6 घंटे की तीनों से पूछताछ:जेल में सौरभ से मिलने पहुंची मां, कोड वर्ड और इशारों में बातचीत

जेल में आत्मविश्वास से भरा दिखा सौरभ, शरद-चेतन तनाव में, आज ईडी फिर जेल में कर सकती है पूछताछ परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा, उसके साथी चेतन सिंह गौर और शरद जायसवाल की पहली रात जेल में करवटें बदलते हुए गुजरी। सुबह 11 बजे सौरभ की मां उमा शर्मा जेल में उससे मिलने पहुंचीं। दोपहर 12 बजे ईडी की टीम पूछताछ के लिए जेल पहुंची, जो शाम 6:15 बजे बाहर निकली। टीम ने तीनों से सोने और नकदी से लदी कार और परिवहन विभाग की काली कमाई से खरीदी गई संपत्तियों को लेकर सवाल किए। ईडी ने छापों में मिले प्रॉपर्टी और निवेश दस्तावेज भी सामने रखे। पूछताछ के दौरान किसी को अंदर जाने की अनुमति नहीं थी। हालांकि, दो बार चाय-कॉफी दी गई। सूत्रों के अनुसार, ईडी गुरुवार को भी पूछताछ कर सकती है। सूत्रों के मुताबिक, सौरभ पूरी तरह टेंशन फ्री और कॉन्फिडेंट दिखा, जबकि शरद और चेतन तनाव में नजर आए। दोनों ने ज्यादा बातचीत नहीं की। हालांकि, तीनों आपस में चर्चा करते दिखे। तीनों के परिजन मिलने आए
सुबह 10 बजे सौरभ, चेतन और शरद से मिलने उनके परिजन पहुंचे। सौरभ की मां ने 15 मिनट तक उससे बात की। हिडन कैमरे और रिकॉर्डिंग की आशंका में कोडवर्ड और इशारों में बातचीत हुई। चेतन से उसके पिता प्रताप सिंह ने 10 मिनट मुलाकात की। शरद से मिलने उसकी भांजी पलक और दोस्त नेहुल पहुंचे। शरद ने कहा, ‘जेल हम जैसे लोगों के लिए नहीं है, सारे आरोप झूठे हैं।’ उसने जल्द जमानत याचिका लगाने को कहा। कैदियों से अलग मिला खाना… सुबह 6:30 बजे तीनों बैरक से बाहर आए। उन्हें लाइनअप में शामिल नहीं किया गया। नाश्ते में मीठा दलिया, 11:30 बजे पत्ता गोभी की सब्जी, दाल-चावल और रात को आलू बैंगन की सब्जी, दाल-चावल मिला। तीनों पूरी तरह से स्वस्थ: लोकायुक्त पुलिस की रिमांड के दौरान सौरभ, चेतन और शरद के वकीलों ने तीनों के स्वास्थ्य को लेकर आशंका जताई थी। बता दें, जेल आने से पहले तीनों का मेडिकल चेकअप कराया गया था, जिसमें तीनों पूरी तरह से स्वस्थ पाए गए थे। इधर, लोकायुक्त पुलिस का दावा- बढ़ सकते हैं आरोपी
सौरभ, चेतन और शरद से की गई पूछताछ के बाद सामने आए तथ्यों के आधार पर बेनामी प्रॉपर्टी के कागजों में मालिकों को नोटिस देकर बुलाया गया है। बुधवार को इनमें से किसी के बयान नहीं हुए, वहीं इंदौर, ग्वालियर, भोपाल और जबलपुर के जिला पंजीयकों को भेजी गई प्रॉपर्टी की सूची की जानकारी मिलते ही जांच का दायरा बढ़ाने की बात कही जा रही है। लोकायुक्त पुलिस के अफसरों के मुताबिक कुछ अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया जा सकता है।

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