पानीपत जिला कोर्ट में ‘जियो’ का नेटवर्क फेल:लोक अदालत की मैनेजमेंट से जवाबतलबी; वकील बोले- कॉल करने-सुनने को चैंबर से बाहर जाना पड़ता

पानीपत जिला कोर्ट परिसर में मोबाइल नेटवर्क में आ रही दिक्कतों से परेशान वकीलों ने खुद कोर्ट में केस दायर कर दिया। टेलिकॉम कंपनी रिलायंस जियो के खिलाफ लोक अदालत में दायर याचिका में कंपनी की मैनेजमेंट को भी पार्टी बनाया है। याचिका में वकीलों ने कहा कि उनके चैंबरों में रेंज नहीं आती। मुवक्किल से बात करने के लिए खुले मैदान में जाना पड़ता है। याचिकाकर्ता ने कहा कि इससे अदालती कामों में अनावश्यक देरी होती है। याचिकाकर्ता एडवोकेट अमित राठी ने बताया कि अदालत ने याचिका पर सुनवाई करते हुए सभी को समन जारी कर जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 20 फरवरी को होनी सुनिश्चित की गई है। पूरा मामला: फेसबुक से लोक अदालत तक का सफर
पानीपत कोर्ट परिसर में प्रैक्टिस करने वाले एडवोकेट अमित राठी (43) पिछले काफी समय से जियो नेटवर्क की खराब सेवाओं से जूझ रहे थे। उन्होंने अपनी शिकायत में बताया कि कोर्ट परिसर, विशेष रूप से वकीलों के चेंबर, दो मुख्य कोर्ट बिल्डिंग और टाइपिस्ट कॉम्प्लेक्स में जियो का नेटवर्क पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है। अमित राठी ने ‘लीगल सर्विसेज अथॉरिटीज एक्ट, 1987’ की धारा 22-C के तहत यह आवेदन दायर किया है, जो सार्वजनिक उपयोगिता सेवाओं में विवाद निपटान से संबंधित है। उनका कहना है कि एक बार किसी मामले में क्लाइंट ने फेसबुक से कुछ सबूत दिखाने थे। लेकिन नेटवर्क की दिक्कतों के चलते वे उस समय वह नहीं देख सके। इसके बाद उन्होंने मन बना लिया था कि वे अदालत का रुख करेंगे। याचिका में नेटवर्क की खराबी के कारण होने वाली 4 बड़ी समस्याओं का जिक्र… जियो मैनेजमेंट को क्यों बनाया पक्ष?
एडवोकेट अमित राठी ने इस मामले में रिलायंस जियो के हेड ऑफिस (नवी मुंबई) को संबोधित करते हुए कंपनी मैनेजमेंट को प्रतिवादी बनाया है। इसके अलावा, पानीपत के जीटी रोड स्थित ब्रांच मैनेजर को भी इसमें पक्षकार बनाया गया है। शिकायतकर्ता का तर्क है कि कंपनी के शीर्ष अधिकारी अपनी सेवाओं की गुणवत्ता के लिए जिम्मेदार हैं और ट्राई के नियमों के तहत ग्राहकों को बेहतर सेवा प्रदान करने के लिए बाध्य हैं। कोर्ट परिसर में रोष का माहौल
पानीपत कोर्ट के अन्य वकीलों ने भी इस पहल का समर्थन किया है। एडवोकेट जगविंद्र मलिक, सुनील वधवा, अशोक, विनय, दीपक मलिक, आजम खान, अजय, गौरव का कहना है कि बार-बार कस्टमर केयर और स्थानीय अधिकारियों से शिकायत करने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है। वकीलों का आरोप है कि रिलायंस जियो जैसी बड़ी कंपनी का नेटवर्क एक जिला मुख्यालय के न्यायालय परिसर में विफल होना प्रशासनिक लापरवाही का चरम है। इस मामले की अगली सुनवाई स्थायी लोक अदालत में होगी, जहां रिलायंस जियो को अपना पक्ष रखना होगा। यह मामला न केवल पानीपत बल्कि देश भर के उन उपभोक्ताओं के लिए एक मिसाल बन सकता है जो टेलीकॉम कंपनियों की खराब सेवाओं से त्रस्त हैं, लेकिन कानूनी रास्ता अपनाने से हिचकिचाते हैं।

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