जोधपुर कमिश्नरेट के खांडा फलसा थाना क्षेत्र में गुरुवार को दिनदहाड़े एक युवक के अपहरण के मामले में पुलिस ने अपहृत युवक को दस्तयाब कर वारदात में शामिल 5 बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले में एक हैरान करने वाला मोड़ तब आया, जब जांच के दौरान पुलिस विभाग के ही दो कांस्टेबलों की भूमिका संदिग्ध होने के संकेत मिले। इस पर सख्त कार्रवाई करते हुए कमिश्नर ओमप्रकाश ने दोनों कांस्टेबलों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, तकनीकी साक्ष्य और कॉल डिटेल्स के आधार पर इन पुलिसकर्मियों की भूमिका जांच के दायरे में आई है, जिसके बाद कमिश्नर ने विभागीय जांच के आदेश भी दिए हैं। सफेद बलेनो कार में आए थे बदमाश घटनाक्रम के मुताबिक, 29 जनवरी को दोपहर करीब 12 बजे मेड़ती गेट निवासी मोहम्मद उमर ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। परिवादी ने बताया कि उनका बेटा मनान चाय पीने के लिए स्कूल के पास शनिश्चर जी के थान की तरफ जा रहा था। तभी एक सफेद रंग की बलेनो कार वहां आई। कार में सवार 4-5 लड़कों ने, जिनके मुंह पर कपड़ा बंधा हुआ था, मनान को जबरदस्ती गाड़ी में डाला और अगवा कर ले गए। घटना की जानकारी मनान के साथी राकिब ने पिता को दी थी। पुलिस ने रिपोर्ट के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। इसके लिए पूरे शहर की नाकाबंदी करवाई गई। लेनदेन का विवाद और 5 गिरफ्तारियां पुलिस उपायुक्त (पूर्व) पी.डी. नित्या ने बताया कि पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें शाहरूख खान (25) पुत्र बाबू खां, निवासी न्यू कोहिनूर सिनेमा के पास, मसूरिया, सद्दाम हुसैन (29) पुत्र लियाकत अली, निवासी उदयमंदिर, आसिफ अली (24) पुत्र लियाकत अली, निवासी रोहट, जिला पाली, कमलेश कुमार (23) पुत्र रामकिशन बिश्नोई, निवासी झाब, जिला जालोर और भावेश पटेल (18) पुत्र सोहनराम, निवासी लूणी, जोधपुर शामिल हैं। पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि दोनों पक्ष पूर्व में एक-दूसरे से परिचित हैं और उनके बीच रुपये-पैसे के लेनदेन का विवाद चल रहा था। इसी विवाद के चलते अपहरण की इस घटना को अंजाम दिया गया। संदेह के घेरे में खाकी मामले की जांच के दौरान तकनीकी साक्ष्यों और घटनाक्रम में पुलिसकर्मियों की संलिप्तता के संकेत मिले। इस पर सख्त कार्रवाई करते हुए पुलिस आयुक्त ने खांडा फलसा थाने के कांस्टेबल परसाराम (बेल्ट नं. 2553) और कांस्टेबल जगदीश (बेल्ट नं. 1663) को निलंबित कर दिया। निलंबन आदेश में स्पष्ट किया गया है कि दोनों के विरुद्ध विभागीय जांच प्रस्तावित होने के कारण यह कार्रवाई की गई है। निलंबन काल के दौरान इन दोनों का मुख्यालय पुलिस लाइन, जोधपुर रहेगा। पुलिस टीमों में शामिल अधिकारी-जवान दिनदहाड़े हुई इस वारदात का खुलासा करने के लिए एडीसीपी वीरेन्द्र सिंह और एसीपी (सेंट्रल) मंगलेश चुंडावत की अगुवाई में अलग-अलग टीमें गठित की गई थी। इनमें खांडाफलसा थानाधिकारी बलवंतराम, सदर बाजार थानाधिकारी माणक राम, सदर कोतवाली थानाधिकारी अनिल यादव, लूणी थानाधिकारी सुरेश चौधरी और पाली जिले के रोहट थानाधिकारी पदमदान शामिल रहे। इनके सहयोग के लिए खांडाफलसा के उप निरीक्षक किशोर सिंह, साइबर सेल (पूर्व) के एएसआई राकेश और रोहट थाने के एएसआई मोडाराम को भी टीम में जोड़ा गया। इसके अलावा रोहट थाने से हेड कांस्टेबल कमल सिंह, कांस्टेबल गणेश, मनसुख, भैराराम, भंवर लाल, चालक श्रवणराम और दिनेश ने भी अहम भूमिका निभाई। टीम में डीएसटी (पूर्व) के कांस्टेबल गोपीचंद सहित पूरी डीएसटी टीम, सीएसटी टीम, नागोरी गेट थाना टीम और कमांड कंट्रोल रूम की टीम भी शामिल थी। इन सभी के साझा प्रयासों और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने आरोपियों को दबोच लिया।


