मध्य प्रदेश आयुष्मान भारत योजना में बड़े भ्रष्टाचार के खुलासे के बाद सरकार ने कार्रवाई की है। आयुष्मान विभाग के सीईओ योगेश भरसट के पीए छोटेलाल सिंह और विभाग के महाप्रबंधक (ऑपरेशनल) इंद्रजीत सिकरवार को सस्पेंड कर दिया गया है। आयुष्मान मित्र संदीप सिंह की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। पांच निजी अस्पतालों की मान्यता भी रद्द कर दी है। यह कार्रवाई दैनिक भास्कर एप पर प्रकाशित इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट के बाद की गई है। भास्कर की जांच में सामने आया था कि किस तरह आयुष्मान योजना पर मेडिकल माफिया का कब्जा है। कई इम्पैनल्ड अस्पतालों में नियमों को ताक पर रखकर किराए के स्पेशलिस्ट डॉक्टर दिखाए जा रहे थे और पूरे सिस्टम को मिलीभगत से चलाया जा रहा था। भोपाल के इन पांच अस्पतालों की मान्यता रद्द आयुष्मान मित्र ने दी CEO के पीए से मिलने की सलाह
पड़ताल के दौरान भास्कर रिपोर्टर की मुलाकात आयुष्मान मित्र संदीप सिंह से हुई। संदीप ने रिपोर्टर को सीधे सीईओ योगेश भरसट के पीए छोटेलाल सिंह से मिलने की सलाह दी। पहली मुलाकात में छोटेलाल ने रिपोर्टर को विभाग के महाप्रबंधक (ऑपरेशनल) इंद्रजीत सिकरवार से मिलने भेज दिया। सिकरवार से बातचीत में भरोसा दिलाया गया कि संबंधित अस्पताल को जल्द ही आयुष्मान योजना में इम्पैनल्ड कर दिया जाएगा। दूसरी मुलाकात सीधे 10 लाख रुपए की डिमांड की रिपोर्टर की दूसरी बार पीए छोटेलाल सिंह से मुलाकात हुई तो उसने सीधे तौर पर पैसों की मांग कर दी। छोटेलाल ने कहा कि अगर 10 लाख रुपए दिए जाएं तो मार्च के बाद आयुष्मान से हटाए जाने वाले करीब 200 अस्पतालों की सूची में नए अस्पतालों के नाम जोड़े जाएंगे। उसी प्रक्रिया में संबंधित अस्पताल को भी इम्पैनल्ड करवा दिया जाएगा। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद सरकार हरकत में आई और पूरे मामले को गंभीर मानते हुए कार्रवाई की। पीए छोटेलाल सिंह और महाप्रबंधक इंद्रजीत सिकरवार को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया, जबकि आयुष्मान मित्र संदीप सिंह की सेवाएं समाप्त कर दी गईं। पांच अस्पतालों की मान्यता रद्द
भास्कर ने इन्वेस्टिगेशन के पार्ट 1 में बताया था कि राजधानी में कुछ ऐसे अस्पताल है जहां अस्पतालों ने डॉक्टरों को किराए पर रखा हुआ है। जबकि नियम के मुताबिक आयुष्मान योजना के लिए इम्पैनल्ड अस्पतालों में डॉक्टरों का रहना जरूरी है। इस खुलासे के बाद 29 जनवरी को आयुष्मान सीईओ कार्यालय की टीम ने इन अस्पतालों का दौरा किया। इसमें तृप्ति, पीजीबीएम, सूर्यांश, क्योर एंड क्योर और ग्रीन सिटी अस्पताल की मान्यता तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दी गई है। सभी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इससे पहले 28 जनवरी को खबर प्रकाशित होने के बाद टीम ने जांच की थी, जिसमें बेड संख्या गलत मिली, रजिस्टर में दर्ज डॉक्टर मौके पर नहीं थे। कुछ अस्पतालों में आयुर्वेद चिकित्सकों से एलोपैथिक इलाज कराया जा रहा था। आयुष्मान सीईओ ने स्पष्ट किया है कि पांचों निजी अस्पतालों के स्पष्टीकरण यदि संतोषजनक नहीं पाए गए, तो उनकी मान्यता स्थायी रूप से रद्द की जा सकती है। योजना में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। भास्कर इन्वेस्टिगेशन के दोनों पार्ट पढ़िए… अस्पताल-मरीज-डॉक्टर…सबका सौदा; भास्कर के कैमरे पर खुलासा:खुद को 17 अस्पतालों का संचालक बताने वाला बोला-एक करोड़ में सेटअप, 20 लाख में आयुष्मान में रजिस्ट्रेशन एमपी में केंद्र की महत्वाकांक्षी आयुष्मान योजना मेडिकल माफिया के कब्जे में है। एक शख्स के नाम पर कई अस्पतालों का संचालन हो रहा है। योजना में अस्पताल का रजिस्ट्रेशन कराने के लिए प्राइवेट अस्पताल डॉक्टरों को किराए पर रखते हैं। कई निजी अस्पताल ऐसे चल रहे हैं, जहां डॉक्टर केवल कागजों और सरकारी पोर्टल पर मौजूद हैं। पूरी खबर पढ़ें… आयुष्मान में एंट्री का रेट 10 लाख!:MP में इम्पेनलमेंट के नाम पर खुली रिश्वत का खेल, CEO के PA का स्टिंग खुलासा एमपी के किसी भी प्राइवेट अस्पताल को आयुष्मान योजना में इमपेनल्ड कराना है तो आयुष्मान विभाग के अफसर 10 लाख रुपए लेते हैं। इनमें सभी का हिस्सा बंटा होता है। अफसरों के पास सबसे ज्यादा हिस्सा पहुंचता है। ये खुलासा आयुष्मान के सीईओ योगेश भरसट के पीए छोटेलाल ने भास्कर के खुफिया कैमरे पर किया है। पूरी खबर पढ़ें…


