ईडी भोपाल ने दो अलग-अलग मामलों में आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने और फर्जी दस्तावेजों से लोन लेकर वाहनों की डिलीवरी किए बगैर बैंक के साथ धोखाधड़ी करने के मामले में कार्रवाई की है। आय से अधिक संपत्ति के मामले में छतरपुर जिले के प्रभारी प्रधानाचार्य की 1.23 करोड़ की अवैध आमदनी पर कोर्ट में पीसी दर्ज कराई गई है। वहीं केनरा बैंक से लोन लेकर 18.32 करोड़ की धोखाधड़ी के मामले में कोर्ट के माध्यम से बैंक के डूबे हुए 45 करोड़ रुपए की वसूली में मदद की है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जगदंबा एएमडब्ल्यू ऑटोमोटिव्स प्राइवेट लिमिटेड के द्वारा केनरा बैंक के साथ की गई धोखाधड़ी के मामले में 45 करोड़ रुपए की वसूली में मदद की है। यह वसूली जगदंबा एएमडब्ल्यू ऑटोमोटिव्स प्राइवेट लिमिटेड और अन्य के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले से संबंधित है। जिसमें सीबीआई, बीएस एंड एफसी, नई दिल्ली ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और आईपीसी की धाराओं के अंतर्गत मामला दर्ज किया था। ईडी के अनुसार, केनरा बैंक के साथ धोखाधड़ी से लगभग 18.32 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था। जिसमें ब्याज की राशि शामिल नहीं है। बताया जा रहा है कि एएमडब्ल्यू, उसके निदेशक पुष्पेंद्र सिंह और परिवार के सदस्यों और बैंक अधिकारियों के खिलाफ इस धोखाधड़ी पर मामला दर्ज किया गया था। फर्जी दस्तावेजों से लोन लेकर नहीं करते थे वाहन डिलीवरी ईडी की जांच से पता चला है कि जगदंबा एएमडब्ल्यू ऑटोमोटिव्स प्राइवेट लिमिटेड और इसके निदेशक और मुख्य आरोपी पुष्पेंद्र सिंह ने अन्य लोगों के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करके और वाहनों की डिलीवरी न करके कई वाहनों पर लोन धोखाधड़ी से हासिल किए। इस प्रकार मिले लोन को उन्होंने अपने अन्य व्यवसाय, परिवार के सदस्यों के खातों में ट्रांसफर किया और अपने निजी लाभ के लिए इस्तेमाल किया। इससे दूसरों के बकाया का भुगतान किया गया। इस तरह आरोपियों ने फर्जी उधारकर्ताओं के नाम पर लिए गए ऋण की राशि को अपने निजी लाभ के लिए हड़प लिया, जिससे कैनरा बैंक, जबलपुर को नुकसान हुआ। कंपनी डायरेक्टर की प्रॉपर्टी कर चुके कुर्क ईडी की अब तक की जांच से पता चला है कि आरोपियों द्वारा अर्जित अपराध की आय 18.32 करोड़ रुपए है। भोपाल ईडी ने पहले पीएमएलए 2002 के प्रावधानों के अंतर्गत आरोपी पुष्पेंद्र सिंह और अन्य की 5.32 करोड़ रुपए की अचल और चल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया था। इसके बाद अभियोजन शिकायत 13 मार्च 2024 को दायर की गई और शिकायत का संज्ञान विशेष न्यायालय (पीएमएलए) जबलपुर द्वारा लिया गया और आरोप तय किए गए। केनरा बैंक ने 9 जनवरी 2025 को पीएमएलए की धारा 8(8) के तहत कुर्क की गई संपत्तियों की बहाली के लिए एक आवेदन दायर किया। सभी पक्षों को सुनने के बाद विशेष न्यायालय (पीएमएलए) जबलपुर ने 29 जनवरी 2026 को एक आदेश पारित किया। जिसमें केनरा बैंक के पक्ष में 45 करोड़ की संपत्तियों की बहाली का निर्देश दिया गया। छतरपुर के प्रभारी प्रधानाचार्य के खिलाफ 1.23 करोड़ की अवैध आय पर पीसी दर्ज एक अन्य मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भोपाल ने सरकारी बी.एड कॉलेज छतरपुर के तत्कालीन प्रभारी प्रधानाचार्य संतोष कुमार शर्मा और अन्य के खिलाफ पीएमएलए 2002 के प्रावधानों के अंतर्गत अभियोग शिकायत दर्ज की है। विशेष पीएमएलए न्यायालय भोपाल में 28 जनवरी 2026 को यह शिकायत दर्ज की गई। इसके अलावा अभियुक्तों के खिलाफ पूर्व संज्ञान सुनवाई के लिए नोटिस जारी किया गया है। ईडी ने लोकायुक्त पुलिस भोपाल द्वारा विशेष न्यायालय भोपाल में संतोष कुमार शर्मा और अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की। ईडी की जांच में पता चला कि संतोष कुमार शर्मा ने लोक सेवक के रूप में कार्य करते हुए अपने पद का आपराधिक दुरुपयोग किया और अपनी ज्ञात आय के स्रोतों के विपरीत 1 करोड़ 23 लाख 32 हजार 57 रुपए की संपत्ति अर्जित की। यह भी पता चला कि वह और उनके परिवार के सदस्य अपराध की आय का लाभ ले रहे थे और उन्होंने अनुसूचित अपराध से हासिल अपराध की आय के संबंध में मनी लॉन्ड्रिंग का अपराध किया। वैध आय से 95 प्रतिशत अधिक मिली अवैध आमदनी जांच के दौरान ईडी, भोपाल जोनल कार्यालय द्वारा 29 अगस्त 2025 को अनंतिम कुर्की आदेश जारी किया गया। इसमें 1 करोड़ 19 लाख रुपए की अचल संपत्ति और 3 लाख 52 हजार 571 रुपए की चल संपत्ति, कुल मिलाकर 1 करोड़ 22 लाख 61 हजार 571 रुपए कुर्क की गई। जांच अवधि के दौरान आरोपी ने 1 करोड़ 30 लाख 27 हजार 494 रुपए की वैध आय अर्जित की, जबकि उसके कुल व्यय और निवेश का आकलन 2 करोड़ 53 लाख 59 हजार 551 रुपए किया गया, जिसके परिणामस्वरूप 1 करोड़ 23 लाख 32 हजार 57 रुपये की अनुपातहीन संपत्ति हुई, यानी उसकी वैध आय से लगभग 95% अधिक रही है। आरोपी ने कथित तौर पर अपने नाम के साथ-साथ अपनी पत्नी और परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर पर्याप्त चल और अचल संपत्तियां अर्जित कीं, जो स्वामित्व को छिपाने और अवैध स्रोतों से प्राप्त धन को छुपाने के प्रयासों का संकेत देती हैं। बेहिसाब कैश, वित्तीय लेन-देन का भी हुआ खुलासा जांच से यह भी पता चला कि संपत्तियों और परिसंपत्तियों के अधिग्रहण के लिए बेहिसाब नकदी, अस्पष्ट जमा और कई स्तरों के वित्तीय लेनदेन का इस्तेमाल किया गया था। आरोपी ने काफी मात्रा में ऐसे व्यक्तिगत और घरेलू खर्च भी किए, जिनकी पुष्टि नहीं की जा सकती थी और उसने सीमित वैध आय के साथ मिलाकर अपराध की आय को वैध दिखाने का प्रयास किया। ईडी के अनुसार, प्रथम दृष्टया तथ्यों से यह सिद्ध होता है कि सार्वजनिक पद का दुरुपयोग, अनुपातहीन संपत्ति का कब्ज़ा और अवैध धन को बेदाग संपत्ति के रूप में प्रदर्शित करना भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत अपराध है और यह पीएमएलए 2002 के अंतर्गत अपराध है।


