हरियाणा की ‘छोटी काशी’ भिवानी में बीती रात को आयोजित भजन संध्या में कन्हैया मित्तल के भजनों पर लोग खूब झूमे। ‘कृपा सांवरे की परिवार’ की ओर से आयोजित कार्यक्रम में कन्हैया मित्तल ने मंच से ‘लव जिहाद’ के मुद्दे पर प्रहार करते हुए बेटियों को सतर्क रहने और अपनी पहचान पर गर्व करने की नसीहत दी। “दोस्ती करो तो तसल्ली से जान-पहचान कर लो” भिवानी की अनाजमंडी में महोत्सव में कन्हैया मित्तल चंडीगढ़ सहित अन्य कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति दी और श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर किया। कन्हैया मित्तल ने पंडाल में मौजूद हजारों लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में देश में घुसपैठियों की संख्या बढ़ रही है, जो अपनी पहचान छिपाकर घूम रहे हैं। उन्होंने बेटियों से अपील करते हुए कहा कि… “आजकल बहुत से लोग नकली हिंदू बनकर घूम रहे हैं। मैं अपनी बेटियों से निवेदन करता हूँ कि यदि आप किसी से दोस्ती करती हैं, तो पूरी तसल्ली से उसकी असल पहचान जान लें। पहचान छुपाकर दोस्ती करना एक बड़ी साजिश का हिस्सा हो सकता है।” केवल हरियाणा में बोलते हैं राम-राम वहीं इस दौरान कन्हैया मित्तल ने तेरा सालासर दरबार, तैने पूजे यो संसार…, तूम हो राम के दास, हम तुम्हरे दास… व तेरे राम जी से मेरे हनुमान मेरी राम-राम कर दो… आदि भजनों पर प्रस्तुति दी। उन्होंने कहा कि यूपी में सीताराम बोलते हैं, एमपी में जय श्री राम बोलते हैं, दुनिया में एक सिर्फ हरियाणा हैं, जहां राम-राम बोलते हैं।
पितृ दोष पर बोले कन्हैया कन्हैया मित्तल ने कहा कि हमने आधे देवी-देवता तो हमने इसलिए छोड़ दिए, कहीं नाराज ना हो जाएं। आज किसी से कह दों तुम्हारा काम नहीं बनता, किसी श्याने के पास चले जाओ, जाते ही बता देगा क्यों नहीं बनता। तुम्हें तो पित्र दोष है। उसको पूछना कौन-सा नाराज है, सगा दादा नाराज है या चाचा-ताऊ दादा नाराज है। तुम्हारा परदादा नाराज है, कम से कम उसका नाम तो बता दे। जिसका हमें नाम भी नहीं पता वह चिट्ठी डालता है कि वह नाराज बैठा है। डर के मारे हमारे पित्रों को दूर कर दिया। जो दादा हाथ पकड़कर मंदिर लेकर जाता था, आज 50 साल बाद भी वह पोता मंदिर जाता है तो क्या वह दादा नाराज हो सकता है। तो क्या हमें पित्र दोष हो सकता है। भजन के जरिए दिया कड़ा संदेश महोत्सव के दौरान कन्हैया मित्तल ने एक विशेष काव्य पंक्ति के जरिए लव जिहाद और धर्मांतरण जैसे मुद्दों पर अपनी बात रखी, जिस पर पूरे पंडाल ने तालियों के साथ समर्थन किया। उन्होंने कहा कि… “दुर्गा बन, काली बन, कभी ना बुर्के वाली बन।” “शिव को पूजने वाले शवों को नहीं पूजते” सनातनी पहचान को मजबूत करने पर जोर देते हुए मित्तल ने दो टूक शब्दों में कहा कि हिंदुओं को मजारों पर जाना बंद कर देना चाहिए। उन्होंने कहा, “जो लोग महादेव के उपासक हैं, उन्हें मजारों पर माथा टेकने की जरूरत नहीं है। अपने धर्म के प्रति पक्का रहना ही सच्ची भक्ति है।” समारोह का आकर्षण भजन संध्या में ‘तेरा सालासर दरबार’ और ‘राम-राम’ के उद्घोष के साथ-साथ सामाजिक मुद्दों पर कन्हैया मित्तल के बेबाक बयानों ने युवाओं और महिलाओं का विशेष ध्यान खींचा। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने अपील की कि माता-पिता अपने बच्चों को शास्त्र और शस्त्र दोनों की शिक्षा के साथ-साथ अपनी जड़ों से जोड़े रखें।


