प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत फैकल्टी की रिपोर्ट तलब:हाई कोर्ट ने एनएमसी से पूछा- कॉलेजो में पर्याप्त फैकल्टी जांचने का क्या मैकेनिज़्म है

हाई कोर्ट ने प्रदेश में संचालित सरकारी और प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में फैकल्टी (शिक्षकों) की कमी के मुद्दे पर राज्य सरकार से रिपोर्ट तलब की हैं। सरकार को रिपोर्ट में प्रत्येक मेडिकल कॉलेज में स्वीकृत कुल पदों और पदों के मुकाबलें कार्यरत फैकल्टी की जानकारी कोर्ट में बताने के लिए कहा हैं। साथ ही कोर्ट ने नेशनल मेडिकल कमीशन से भी पूछा है कि इन मेडिकल कॉलेज में पर्याप्त टीचिंग स्टॉफ है या नहीं। इसका पता करने के लिए एनएमसी के पास क्या मैकेनिज्म हैं। सीजे एमएम श्रीवास्तव और जस्टिस उमाशंकर व्यास की खंडपीठ ने यह आदेश महेन्द्र गौड़ की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। निरीक्षण के समय स्टॉफ इधर से उधर करते है
याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता तनवीर अहमद ने कहा कि प्रदेश में संचालित अधिकांश मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सा शिक्षकों की कमी है। नेशनल मेडिकल कमीशन की रिपोर्ट के अनुसार कॉलेज में एक विषय के लिए कम से कम एक शिक्षक तो होना ही चाहिए। शिक्षकों की कमी से एमबीबीएस पाठ्यक्रम का अध्ययन प्रभावित हो रहा है और बिना मार्गदर्शन कोर्स पूरा होने के बाद यह चिकित्सक किस तरह मानव शरीर का इलाज करेंगे, यह समझ से परे है। याचिका में कहा गया कि मेडिकल कॉलेज की मान्यता के लिए होने वाले निरीक्षण के समय दूसरे मेडिकल कॉलेज से शिक्षकों को संबंधित कॉलेज में पदस्थापित कर लिया जाता है और निरीक्षण पूरा होने के बाद शिक्षक को वापस भेज दिया जाता हैं। इसके साथ ही नेशनल मेडिकल कमीशन की वेबसाइट पर चिकित्सा शिक्षकों का डेटा प्रदर्शित होना चाहिए, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि किस मेडिकल कॉलेज में कितने पद स्वीकृत हैं और इनमें से कितने पद खाली चल रहे हैं।

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