अमृतसर में गोल्डन टेंपल में श्री दरबार साहिब की परिक्रमा में सादी वर्दी में आए पुलिस कर्मचारियों द्वारा दो श्रद्धालुओं को जबरन हिरासत में लिया है। जहां एक ओर श्री दरबार साहिब के जत्थेदार ज्ञानी रघुबीर सिंह ने इसे मर्यादा का उल्लंघन बताकर निंदा की है, वहीं पीड़ित परिवार ने पुलिस की इस कार्रवाई को अन्यायपूर्ण बताते हुए पूरी घटना का विवरण साझा किया है। हिरासत में लिए गए व्यक्तियों की पहचान फिरोजपुर जिले के गांव मोहन के हिठाड़ निवासी सतविंदर सिंह और उनके पुत्र प्रिंस के रूप में हुई है। सतविंदर की पत्नी लखबीर कौर ने बताया कि वे आज सुबह करीब 9:30 बजे अपने पति, बेटे और सास रुकमिणी देवी के साथ श्री दरबार साहिब में नतमस्तक होने पहुंची थीं। लखबीर कौर के अनुसार, करीब 10:30 बजे जब हम महिलाएं सरोवर में स्नान करने गईं, तो मेरे पति और बेटा परिक्रमा में हमारा इंतजार कर रहे थे। जब हम स्नान कर वापस लौटीं, तो वे दोनों वहां से गायब थे। हमने उन्हें ढूंढने की बहुत कोशिश की, उनके मोबाइल फोन पर कॉल किया, लेकिन दोनों के फोन स्विच ऑफ आ रहे थे। बाहर कार लेकर खड़ी थी पुलिस चश्मदीदों और परिवार के अनुसार, सादी वर्दी में आए कुछ लोगों ने पिता-पुत्र को परिक्रमा के अंदर से पकड़ा। बाहर वर्दी में दो पुलिसकर्मी पहले से ही कार के साथ तैनात थे। जैसे ही सादी वर्दी वाले लोग दोनों को बाहर लाए, उन्हें तुरंत कार में धकेल दिया गया और वहां से अज्ञात स्थान पर ले जाया गया। इस दौरान SGPC की टास्क फोर्स ने दखल देते हुए कुछ पुलिसकर्मियों को पकड़ा भी, जिन्हें बाद में कमरे में बैठाया गया। घर के ताले तोड़े, परिवार सदमे में पीड़ित महिला लखबीर कौर ने बताया कि जब वे दरबार साहिब से वापस अपने गांव पहुंचीं, तो वहां का मंजर देखकर दंग रह गईं। उनके घर पर पुलिस ने पीछे से छापेमारी की थी और घर के ताले टूटे हुए थे। लखबीर कौर ने कहा, हमें किसी भी पुलिस अधिकारी ने कोई जानकारी या पुष्टि नहीं दी है। मेरे पति का पहले एक जमीन विवाद का मामला था, जिसमें वे सजा काटकर 5-7 महीने पहले ही जमानत पर बाहर आए थे। हमारा किसी अवैध गतिविधि या पाकिस्तान से कोई लेना-देना नहीं है, ये सब झूठी अफवाहें हैं। ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित है पत्नी अपनी बेबसी जाहिर करते हुए लखबीर कौर ने बताया कि वे एक बेहद गरीब परिवार से हैं। उनका बेटा प्रिंस गंगानगर में पढ़ाई कर रहा है। लखबीर कौर खुद गंभीर बीमारी (ब्रेन ट्यूमर) से जूझ रही हैं और उनकी आंखों की रोशनी भी बेहद कम है। उन्होंने प्रशासन से न्याय की गुहार लगाते हुए पूछा कि बिना किसी सूचना के उनके परिवार के साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया जा रहा है। प्रशासनिक चुप्पी और जत्थेदार की चेतावनी इस पूरे घटनाक्रम पर पुलिस प्रशासन ने अभी तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं दिया है। दूसरी ओर, जत्थेदार ज्ञानी रघुबीर सिंह ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि गुरु घर की पवित्रता और मर्यादा सर्वोपरि है। उन्होंने मांग की है कि पुलिस भविष्य में किसी भी कार्रवाई से पहले प्रबंधकों को विश्वास में ले, ताकि श्रद्धालुओं में भय का माहौल पैदा न हो।


