सरकार की सबसे ज्यादा कल्याणकारी आयुष्मान भारत- मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना का लाभ लेने में रिम्स के भर्ती मरीजों को परेशानी हो रही है। यह परेशानी वैसे मरीजों को हो रही है, जो रिम्स के एक विभाग से बेहतर इलाज के लिए दूसरे में शिफ्ट किए जाते हैं। उदाहरण के लिए- यदि मरीज को कई तरह की बीमारी है और पहले मरीज को ब्रेन संबंधी समस्या के लिए न्यूरोसर्जरी विभाग में भर्ती किया गया है। न्यूरोसर्जरी से इलाज के बाद मरीज को हृदय से संबंधित बीमारी के लिए कार्डियोलॉजी विभाग में शिफ्ट किया जाता है तो परेशानी शुरू हो जाती है। क्योंकि आयुष्मान पोर्टल में पेशेंट ट्रांसफर का ऑप्शन ही नहीं है। नतीजतन, ऐसे मरीज को पहले न्यूरोसर्जरी विभाग से डिस्चार्ज लेना पड़ता है। फिर, कार्डियोलॉजी विभाग में भर्ती होना होता है। इसके बाद आयुष्मान के लिए भी दोबारा निबंधन कराना पड़ता है। इस प्रक्रिया के कारण गंभीर मरीजों का इलाज शुरुआत के 2 से 3 दिन काफी प्रभावित होता है। आयुष्मान में रजिस्टर होने के बाद अधिकारी द्वारा अप्रूवल मिलने के बाद ही योजना के तहत मरीज का फिर से इलाज शुरू होता है। यानि रिम्स में ही भर्ती मरीज को आयुष्मान का लाभ लेने के लिए एक विभाग से डिस्चार्ज होकर दोबारा दूसरे विभाग में एडमिशन लेना पड़ता है। आयुष्मान पोर्टल में पेशेंट ट्रांसफर का प्रावधान नहीं न्यूरोसर्जरी में शिफ्ट, पर 3 दिन बाद एक्टिव हुआ आयुष्मान जमुआरी (लातेहार) निवासी बाल किशोर सिंह (49) को 23 जनवरी को न्यूरोसर्जरी विभाग में एडमिट किया गया। इससे पहले ऑर्थोपेडिक विभाग में इलाज चल रहा था। जब न्यूरोसर्जरी में शिफ्ट किया गया तो दोबारा आयुष्मान के कागज लिए गए। इसके 3 दिन के बाद आयुष्मान से इलाज शुरू हुआ। न्यूरोसर्जरी से शिफ्ट हुईं महिला, 2 दिन बाद भी प्रक्रिया पूरी नहीं ब्रेन में चोट लगने के कारण लोधमा निवासी सुमन देवी (36) न्यूरोसर्जरी विभाग में भर्ती हुई थी। करीब 7 दिन आईसीयू में रखकर इलाज व सर्जरी की गई। इसके बाद बेहतर इलाज के लिए मरीज को सुपर स्पेशियलिटी आईसीयू में शिफ्ट किया गया। शिफ्ट होने के 3 दिन बाद तक मरीज का आयुष्मान एक्टिव नहीं हुआ है। आयुष्मान एक्टिव होने में लगते हैं 72 घंटे आयुष्मान के तहत भर्ती मरीजों की सभी तरह की जांच नि:शुल्क होती है। लेकिन, नए एडमिशन के बाद आयुष्मान को एक्टिव होने में कम से कम 48 से 72 घंटे का समय लगता है। इस बीच मुफ्त होने वाली सभी जांच प्रभावित रहती है। या तो मरीजों को अपनी जेब से पैसे खर्च करने पड़ते हैं या आयुष्मान के एक्टिव होने का इंतजार करना पड़ता है। रिम्स में भर्ती मरीज आयुष्मान के तहत इलाज के लिए हैं भर्ती। रिम्स के आंकड़ों के अनुसार, आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाजरत करीब 20 से 25 मरीजों को प्रत्येक दिन एक से दूसरे विभाग में ट्रांसफर किया जाता है। इन सभी मरीजों को पहले विभाग से डिस्चार्ज लेकर दोबारा नए विभाग में एडमिशन लेना पड़ता है। फिर पुराने विभाग से एक्टिव आयुष्मान को बंद कर नए विभाग के साथ चालू किया जाता है। इसमें 2 से 3 दिन बर्बाद हो रहा है। डिस्चार्ज लेकर दूसरे विभाग में पुन: भर्ती होने पर ही मिलेगा आयुष्मान का लाभ 2 केस 1 केस


