चंडीगढ़ में CTU (चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग) की कैश ब्रांच में 13,13,710 रुपये की लूट की वारदात का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। घटना को अंजाम देने वाला कोई बाहरी अपराधी नहीं, बल्कि CTU का सब इंस्पेक्टर और उसका भांजा निकला। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपियों की पहचान वेदपाल सिंह (49 वर्ष, सेक्टर-27/C, चंडीगढ़) और उसके भांजे प्रशांत (30 वर्ष, गांव मंडोरा, जिला सोनिपत, हरियाणा) के रूप में हुई है। पुलिस जांच में सामने आया कि इस लूट का साजिशकर्ता वेदपाल सिंह था। उसने वारदात को अंजाम देने के लिए अपने भांजे को हरियाणा से बुलाया था। आरोपी पुलिस की वर्दी पहनकर कैश ब्रांच में पहुंचा और सरप्राइज चेकिंग की बात कहकर लूट की वारदात को अंजाम दिया। इसके बाद उसने सुरक्षा गार्ड को कमरे में बंद किया और मौके से फरार हो गया। CCTV फुटेज की मदद से पुलिस आरोपियों तक पहुंची। शुरुआत में वेदपाल वारदात से इनकार करता रहा, लेकिन सख्ती से पूछताछ के बाद उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। आरोपी वेदपाल इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 स्थित CTU में कार्यरत है। वह कैश ब्रांच के हर कोने से परिचित था और उसे पता था कि किस समय ब्रांच में कौन-कौन मौजूद रहता है। इसी जानकारी का फायदा उठाकर उसने मौका देखकर वारदात को अंजाम दिया। पहले जानिए कैसे लूट को अंजाम दिया… लुटेरा बोला- मैं पुलिस से हूं, यहां गलत गतिविधियां हो रहीःं वारदात सेक्टर-17 स्थित चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग (CTU) में मंगलवार तड़के 4 बजे के करीब हुई। लुटेरे ने गार्ड को डराते हुए कहा कि उसे रात में यहां गलत गतिविधियों की शिकायत मिली है और सीनियर अफसर भी आ रहे हैं। उसने कहा कि मैं चंडीगढ़ पुलिस में हूं और सरप्राइज चेकिंग को आया हूं। गार्ड से चाबी लेकर उसे बंद कियाः आरोपी ने CTU के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के नाम भी लिए। इसके बाद उसने लॉकर की चाबी और गार्ड का मोबाइल ले लिया और उसे एक कमरे में बंद कर दिया। जिसके बाद लॉकर से करीब 13.30 लाख रुपए नकद लेकर 15 मिनट में ही फरार हो गया। कंडक्टर सुशीला ने कमरा खोलाः करीब सवा 4 बजे ड्यूटी पर आई कंडक्टर सुशीला ने गार्ड के चिल्लाने की आवाज सुनी। उसने कमरे की कुंडी खोली, जिसके बाद गार्ड ने पूरी घटना बताई। कैश चेक करने पर रकम गायब मिली। 3-4 दिन का कैश कलेक्शन थाः इसके बाद घटना की जानकारी सीनियर अधिकारियों को दी गई। बताया जा रहा है कि यह रकम तीन-चार दिन की कैश कलेक्शन थी, जो छुट्टियों के कारण बैंक में जमा नहीं हो सकी थी। पुलिस ने गार्ड को हिरासत में लियाः उसी दिन सीटीयू की ओर से देर शाम सेक्टर-17 थाना पुलिस को शिकायत दी गई। पुलिस ने मामले में शक के चलते ब्रांच में सिक्योरिटी गार्ड गौरव को हिरासत में ले लिया था और उससे पूछताछ भी की थी। लेकिन मामला नहीं सुलझ पाया था। 2 पॉइंट में जानिए कैसे खुला राज सीटीयू के अधिकारियों के नाम से शक हुआ: पुलिस जांच में सामने आई है कि आरोपी को सीटीयू की कैश ब्रांच की कार्यप्रणाली की पूरी जानकारी थी। उसे पहले से पता था कि छुट्टियों की वजह से कई दिनों का कैश ब्रांच में जमा रहता है। इतना ही नहीं, आरोपी को यह भी मालूम था कि रात के समय कैश ब्रांच में केवल एक ही सिक्योरिटी गार्ड तैनात रहता है। वारदात के दौरान उसने सीटीयू के अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम भी लिए, जिससे शक था कि उसे अंदरूनी सूचनाएं पहले से मिली हुई थीं। सख्ती से पूछने पर कबूला जुर्म: लूट की वारदात के बाद पुलिस ने CTU की CCTV और उसके आसपास की फुटेज चेक की, जिससे पुलिस को आरोपी के चलने के तरीके, उसकी लंबाई और कई अहम सबूत हाथ लगे। इसके बाद पुलिस आरोपी तक पहुंची। जब पुलिस ने आरोपी को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया तो पहले आरोपी पुलिस को मना करता रहा कि उसने इस लूट को अंजाम नहीं दिया है, लेकिन सख्ती से पूछताछ करने पर उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया।


