जयपुर-जैनतीर्थ पर क्या दूसरे धर्म के लोगों की एंट्री बंद:सोशल मीडिया पर दावा-ID दिखाने पर ही मिल रहा प्रवेश, जानें- क्या है सच्चाई

जयपुर में आगरा रोड पर स्थित पार्श्वनाथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र चूलगिरी जैन तीर्थ पर दूसरे धर्म के लोगों की एंट्री बैन किए जाने की बातें सामने आईं। सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि अब मंदिर में केवल जैन समाज के लोगों को ही प्रवेश दिया जा रहा है। गेट पर आईडी दिखाने के बाद ही एंट्री मिल रही है। इस दावे के बाद सोशल मीडिया पर विरोध भी शुरू हो गया। वायरल दावों की सच्चाई जानने के लिए भास्कर टीम चूलगिरी जैन तीर्थ पहुंची और मौके पर फैक्ट चेक किया। सबसे पहले जानिए, वायरल वीडियो में क्या..
वायरल वीडियो में एक यूजर चूलगिरी जैन तीर्थ के एंट्री पॉइंट पर खड़ा नजर आता है। वीडियो में युवक कहता है कि जब वह चूलगिरी आ रहा था, तो गेट पर बेरिकेडिंग लगी हुई थी और वहां आईडी कार्ड चेक किया जा रहा था। यूजर के मुताबिक, गेट पर उससे यह पूछा गया कि वह जैन है या नहीं और बताया गया कि सिर्फ जैन होने पर ही ऊपर जाने की अनुमति दी जाएगी, नहीं तो वहीं से वापस लौटना होगा। वीडियो में युवक कहता है कि ऐसी ही व्यवस्था सम्मेद शिखरजी, गिरनारजी और बाहुबलीजी जैसे अन्य जैन तीर्थस्थलों पर भी लागू की जानी चाहिए। अगर हर जगह बिना आईडी चेक के एंट्री नहीं दी जाए और कमेटी के जरिए व्यवस्था लागू हो, तो जैन समाज के लोगों को परेशानी नहीं होगी और जैन तीर्थ सुरक्षित रहेंगे।
भास्कर के फैक्ट चेक में सामने आई ये 3 अहम बातें… 1. आने-जाने वाले की ID चेक करते दिखे सुरक्षाकर्मी भास्कर टीम जब मंदिर के एंट्री पॉइंट पर पहुंची तो यहां तैनात सुरक्षाकर्मी विष्णु वैष्णव हर आने-जाने वाले की आईडी चेक करते दिखे। साथ ही बाइक सवारों को हेलमेट पहनने के लिए भी टोका जा रहा था। सुरक्षाकर्मी विष्णु वैष्णव ने बताया- ऐसा कोई नियम नहीं है कि नॉन-जैन को एंट्री नहीं दी जाएगी। सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक आम विजिटर्स के लिए एंट्री खुली रहती है। आईडी केवल सुरक्षा कारणों से मांगी जाती है ताकि आने वाले लोगों की डिटेल दर्ज की जा सके। यह इलाका चारों तरफ से जंगल से घिरा हुआ है और जंगली जानवरों की आवाजाही रहती है। ऐसे में किसी हादसे की स्थिति में पहचान के लिए आईडी जरूरी है। हेलमेट को लेकर सख्ती पर कहा- रास्ता खड़ी चढ़ाई वाला है। हादसों से बचाव के लिए बिना हेलमेट बाइक सवारों को रोका जाता है। 2. मंदिर के अंदर भी ID जांच
भास्कर टीम जब ऊपर मंदिर परिसर तक पहुंची तो वहां मौजूद सुरक्षा गार्ड ने बताया- बिना आईडी एंट्री नहीं है, लेकिन किसी धर्म के आधार पर रोक नहीं लगाई जा रही है। केवल पहचान के लिए आईडी चेक की जाती है। 3. सुबह 10 बजे तक केवल जैन दर्शनार्थियों की एंट्री मंदिर के सिक्योरिटी सुपरवाइजर बसंत सिंह शेखावत ने बताया- सुबह 6.30 से 10 बजे तक केवल जैन दर्शनार्थियों की एंट्री होती है। यह समय साधना और पूजा का होता है, इसलिए आम विजिटर्स को इस दौरान अनुमति नहीं दी जाती। इसके बाद सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक आम विजिटर्स के लिए दर्शन खुले रहते हैं। शाम 5 बजे के बाद फिर से ध्यान-साधना का समय होता है। जंगली जानवरों की आवाजाही बढ़ जाती है, इसलिए एंट्री बंद कर दी जाती है। किसी विशेष पर्व या खास पूजा के दिन केवल जैन समाज के लोगों को प्राथमिकता दी जाती है, क्योंकि ऊपर व्यवस्थाएं सीमित रहती है। हालांकि, परिवार के साथ आने वालों को अनुमति दी जाती है। जयपुर के रहने वाले आशुतोष ने बताया- मैं ध्यान-साधना के लिए चूलगिरी आया हूं। मैं पिछले कई सालों से यहां आ रहा हूं। मैं जैन नहीं हूं, लेकिन फिर भी ध्यान के लिए किसी ने कभी नहीं रोका। हां, आईडी जरूर चेक की जाती है, लेकिन एंट्री पर कोई रोक नहीं है। वायरल वीडियो और पोस्ट का सच
मंदिर समिति के मंत्री सुदीप सोनी ने बताया- सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाह पूरी तरह गलत है। जो समय आम विजिटर्स के लिए तय है, उसमें सभी को एंट्री दी जाती है। पुलिस की गाइडलाइन के अनुसार विजिटर्स की डिटेल रखना जरूरी है। एंट्री पॉइंट से लेकर मंदिर परिसर तक सीसीटीवी लगे हैं। आईडी चेक केवल सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा है, न कि किसी धर्म के आधार पर रोक। पहाड़ियों पर स्थित है चूलगिरी जैन तीर्थ चूलगिरी जैन तीर्थ झालाना की पहाड़ियों पर स्थित है। मंदिर परिसर में चरण चौबीसी की तीन बड़ी प्रतिमाएं और 21 फीट ऊंची भगवान महावीर की विशाल प्रतिमा स्थापित है। बारिश के दिनों में आसपास का जंगल हरा-भरा हो जाता है। राजस्थान के इस प्रसिद्ध तीर्थ स्थल तक पहुंचने के लिए लगभग 1000 सीढ़ियां चढ़नी होती है। मंदिर का निर्माण 1953 में देशभूषण जी महाराज की प्रेरणा से कराया गया था। —- भास्कर फैक्ट से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… क्या राजस्थान में दुल्हन ससुर-देवर से भी बनाती है संबंध?:युवती का दावा- पहले बच्चे को गिरा दिया जाता है; जानें- क्या है सच्चाई सोशल मीडिया पर एक युवती ने दावा किया है कि राजस्थान में एक परंपरा के तहत शादी के बाद पहले ससुर, फिर देवर और फिर पति के साथ संबंध बनाए जाते हैं और पहले बच्चे को गिरा दिया जाता है। इस परंपरा के लिए शिक्षा की कमी को जिम्मेदार ठहराया है। (पढ़ें पूरी खबर)

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