सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मासिक धर्म स्वास्थ्य को लेकर ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए इसे संविधान के तहत मौलिक अधिकार का हिस्सा घोषित किया। साथ ही कोर्ट ने सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि हर स्कूल में छात्राओं को फ्री सैनिटरी पैड उपलब्ध कराएं। मामले को लेकर शनिवार को दैनिक भास्कर की टीम ने रांची जिले के 25 स्कूलों की ग्राउंड रिपोर्टिंग की। पड़ताल में पाया कि 95 प्रतिशत स्कूलों में 5-7 रुपए देकर सैनिटरी पैड दिया जाता है। कई स्कूलों में एनजीओ की ओर से समय-समय पर बच्चियों को सैनिटरी पैड और हाइजीन को लेकर जानकारी दी जाती है। स्कूलों में सैनिटरी पैड के लिए वेंडिंग मशीन तो लगी है, इनमें 90 प्रतिशत खराब है। वहीं, डिस्पोजल मशीन न के बराबर है। स्कूल की ओर से डस्टबिन की व्यवस्था है। कहीं-कहीं हाथ धोने के लिए साबुन की भी सुविधा नहीं है। राजधानी के प्रमुख स्कूल में हाइजीन कॉर्नर जैसी व्यवस्था नहीं है स्कूल सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीन डिस्पोजल मशीन शौचालय कोर्ट के फैसले का पालन होगा अंधविश्वास के कारण मशीन का इस्तेमाल नहीं करतीं कई छात्राएं छात्राएं बोलीं- पीरियड के दौरान अपनी तैयारी खुद कर स्कूल जाती हूं भास्कर की टीम को छात्राओं ने बताया कि मासिक धर्म के दौरान वे खुद पूरी तैयारी रखती है। बैग में सैनिटरी पैड लेकर स्कूल जाती हैं। स्कूल के शौचालय में साफ-सफाई की व्यवस्था ठीक नहीं रहती है। इस दौरान उन्हें स्वच्छता का खुद पूरा ध्यान नहीं रखना पड़ता है, अन्यथा संक्रमण का खतरा रहता है। पेपर शॉप खुद घर से लेकर स्कूल आती है। डिस्पोजल मशीन नहीं रहती है।


