आज संत रविदास की जयंती है। इस मौके पर काशी में उनकी जन्मस्थली सीर गोवर्धनपुर पूरी तरह से रैदासियों का शहर बन गया है। पंजाब से भी यहां सैकड़ों श्रद्धालु दर्शन करने के लिए पहुंचे हैं। पंजाब के एक भक्त ने यहां 20 लाख रुपए का दान भी किया है। सुबह से ही मंदिर के बाहर करीब 3 किलोमीटर लंबी लाइन लगी हुई है। लोग घंटों इंतजार करके संत रविदास के दर्शन कर रहे हैं। करीब 1000 से ज्यादा NRI 10 चार्टर्ड विमानों से काशी पहुंचे हैं। संत रविदास की प्रतिमा को अमेरिकी डॉलर की माला पहनाई गई। हालांकि, अभी ट्रस्ट ने इसकी कीमत नहीं बताई है। किसने दान किया है, यह भी नहीं बताया गया। मंदिर के पास 150 फीट ऊंची रविदासी पताका भी फहराई गई है। मंदिर को करीब 200 किलो से ज्यादा सोने से सजाया गया है। श्रद्धालुओं के लिए मंदिर परिसर में तीन बड़े लंगर चल रहे हैं। यहां 10-10 फीट के तवों पर हर मिनट करीब एक हजार रोटियां बनाई जा रही हैं। हजारों लोगों को प्रसाद बांटा जा रहा है। व्यवस्था संभालने के लिए 10 हजार से ज्यादा सेवादार दिन-रात लगे हुए हैं। बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए टेंट सिटी भी बनाई गई है। इसमें पंजाब, हिमाचल प्रदेश समेत कई राज्यों से आए लोगों के लिए रहने और खाने की सुविधा दी गई है। इस कार्यक्रम में कई बड़े नेता भी शामिल हो चुके हैं। प्रधानमंत्री मोदी, मुख्यमंत्री योगी, पूर्व सीएम मायावती, दिल्ली के पूर्व CM अरविंद केजरीवाल, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी जैसे नेता यहां मत्था टेक चुके हैं। काशी में रविदास जयंती के PHOTOS… रविदास जयंती पर दान, स्वर्ण मंदिर का संकल्प
काशी में संत रविदास जयंती में मुख्य सत्संग पंडाल में संगत में आए लोगों ने दान किए है। इसमें पंजाब के एक भक्त ने 20 लाख रुपए और पंचकूला हरियाणा की संगत ने पांच लाख का चेक मंदिर ट्रस्ट को सौंप दिया है। इसके आलावा गोपनीय दान भी खूब हुए हैं। इन दानदाताओं ने मंदिर को स्वर्ण मंदिर बनाने के संकल्प को पूरा करने में लगे हैं। दान के पैसे से मंदिर का गुंबद स्वर्णमंडित, सोने का दीपक दरवाजे पर सोने का कवर चढ़ चुका है। पंजाब के श्रद्धालुओं ने क्या कहा यूके से आए संधू बोले- 2 चार्टड प्लेन लेकर आए
यूके से पहुंचे पंजाबी मूल के डोगू संधू ने कहा- हम 1994 से आ रहे हैं। उस समय 2 चार्टर्ड प्लेन लेकर आए थे। जिसमें 400 से 500 लोग थे। उसके बाद हर साल संगत बढ़ती है। इस बार 10 चार्टर्ड प्लेन लेकर आए हैं। लुधियाना के रमेश बोले- 700 NRI आए हैं
लुधियाना के रमेश कुमार ने बताया कि इस बार 700 NRI आए हैं। जिसमें अमेरिका, इंग्लैंड,यूके, फ्रांस, जर्मनी के है। यह सभी अपने देश से अमृतसर या दिल्ली उतरते हैं। फिर वहां से पंजाब और संत निरंजन दास के साथ स्पेशल ट्रेन से काशी पहुंचते हैं। हरप्रीत बोलीं- यहां जो मांगते हैं, पूरा हो जाता है
हरप्रीत कौर ने कहा कि हमने सुना है कि गुरु जी ने हमारे वर्ग के लिए बहुत सी कुर्बानी दी है। यहां आने पर जो भी मांगा जाता है वह पूरा होता है। इसलिए हम सभी दर्शन करने के लिए पहुंचे हैं। इस बार हर साल से ज्यादा भीड़ हैं। व्यवस्थाएं काफी अच्छी है तो सब काम समय में हो जा रहा। होशियारपुर सोनिया दीप बोलीं- गुरु जी हर मुराद पूरी करते हैं
होशियारपुर से आईं सोनिया दीप ने कहा कि हमने गुरु जी के बारे में बहुत कुछ सुना था इसलिए पहली बार यहां दर्शन करने के लिए पहुंची हूं। गुरु जी हर मुराद पूरी करते हैं। उसी को लेकर हम यहां पहुंचे हैं। सिंदर कौर ने कहा- परिवार में तरक्की है और क्या चाहिए
पंजाब से आईं सिंदर कौर ने कहा- महाराज जी से जो मांगा वह मिला। जीवन में खुशी है। परिवार में तरक्की है। और क्या चाहिए। सुखविंदर बोलीं- गुरु जी ने हम लोगों के लिए बहुत कुछ किया
पंजाब से आईं सुखविंदर ने कहा- गुरु जी ने हम लोगों के लिए बहुत कुछ किया। इस बार पांचवा साल है, हम लोग दर्शन करने आए हैं। व्यवस्था अच्छी है। खुशी मिली। अब जानिए कैसे हुई मंदिर की स्थापना
कहा जाता है कि काशी के सीरगोवर्धनपुर में संत रविदास 649 साल पहले जन्म हुआ था। ट्रस्ट से जुड़े निरंजन दास चीमा ने बताया कि रैदासियों के गुरु डेरा संत सरवन दास जी महाराज ने इस मौजूदा मंदिर का निर्माण कराया था। 1965 के आषाढ़ मास में इसकी नींव रखी गई थी और 7 साल बाद यानी 1972 में यह संत रविदास का यह मंदिर बनकर तैयार हुआ। मंदिर निर्माण के बाद से ही संत रविदास के की जयंती के अवसर पर रैदासियों की भीड़ यहां लगने लगी। पंजाब, हरियाणा, हिमाचल समेत विदेशों में रहने वाले एनआरआई भक्त भी हर साल यहां आते हैं। इन भक्तों ने संत रविदास को अरबों रुपए दान भी दिया है। मंदिर में 130 किलो सोने की पालकी, कहा जाता है दूसरा गोल्डन टेंपल वाराणसी के सीरगोवर्धन स्थित संत रविदास का मंदिर रैदासियों की आस्था का केंद्र है। यहां प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक हाजिरी लगा चुके हैं। मंदिर के शिखर का कलश और मंदिर में मौजूद संत रविदास की पालकी से लेकर छत्र तक सब कुछ सोने का है। श्रद्धालुओं के दान से संत के मंदिर के शिखर को स्वर्ण मंडित कराया गया है। संत रविदास मंदिर में 130 किलो सोने की पालकी रखी हुई है। इसे 2008 में यूरोप के भक्तों ने संगत कर पंजाब के जालंधर में बनवाया था। इसका अनावरण बसपा सुप्रीमो मायावती ने फरवरी 2008 में किया था। इस पालकी को साल में एक बार जयंती के दिन निकाला जाता है। इस मंदिर का निर्माण 1965 में हुआ था। यहां पहला स्वर्ण कलश 1994 में संत गरीब दास ने संगत के सहयोग से चढ़ाया था। बाद में भक्तों ने इसे 32 स्वर्ण कलशों से सुशोभित किया। इसके अलावा 2012 में 35 किलो का सोने का स्वर्ण दीपक बनवाया गया। इसमें अखंड ज्योति जल रही है। इस दीपक में एक बार में 5 किलोग्राम घी भरा जाता है। इतना ही नहीं एक भक्त ने संगत कर मंदिर में 35 किलो सोने का छत्र भी लगाया है। कुल मिलाकर इस पूरे मंदिर में 200 किलो से ज्यादा सोना मौजूद है। जो हर साल भक्तों के दान से बढ़ता ही जा रहा है। इस तरह रही संत रविदास मंदिर की विकास यात्रा • जून 1965 को संत रविदास मंदिर के नींव की पहली ईंट रखी गई थी। फरवरी, 1974 में संत रविदास की मूर्ति स्थापित हुई। • 7 अप्रैल, 1994 को कांशीराम ने पहला स्वर्ण कलश मंदिर पर लगाया। • साल 2008 में पंजाब से स्वर्ण पालकी काशी लाई गई। इसका लोकार्पण तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने किया था। • 30 जनवरी, 2010 को काशी से रविदासिया धर्म की स्थापना हुई और अमृतवाणी का ऐलान किया गया। • 2012 में मंदिर का सबसे बड़ा शिखर स्वर्ण मंडित कराया गया। • 2015 से मंदिर में चौबीसों घंटे लगातार अखंड स्वर्ण दीप जल रहा है। • PM नरेंद्र मोदी द्वारा 2019 में मंदिर के सुंदरीकरण और विस्तारीकरण की आधारशिला रखी। • CM योगी आदित्यनाथ ने साल 2023 में 24 करोड़ रुपए से संत रविदास म्यूजियम बनाने की घोषणा की।


