कोटा में एक नगर निगम होने के बाद भी अभी तक दो निगम के हिसाब से ही अधिकारी व कर्मचारी काम कर रहे थे। अधिकतर तो असमंजस की स्थिति में थे कि वे कहां और क्या काम करें। लेकिन अब नगर निगम आयुक्त ने आदेश जारी कर सभी अधिकारियों व कर्मचारियों को उनका काम विभाजन कर दिया है। कोटा में पहले उत्तर व दक्षिण दो निगम थे। जिसके हिसाब से हर अनुभाग में कर्मचारियों का काम तय था। उत्तर व दक्षिण में मुख्य लेखाधिकारी से लेकर अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी, राजस्व से लेकर अगिनशमन तक में अधिकारियों को दोनों निगम के हिसाब से लगाया हुआ था। लेकिन राज्य में सरकार बदलने व निवर्तमान बोर्ड का कार्यकाल पूरा होने के बाद एक निगम तो बना दिया गया। लेकिन कर्मचारियों को कहां काम करना है उनका कार्य विभाजन नहीं किया गया था। नगर निगम में वर्तमान में 100 वार्ड बनाए गए हैं। उन वार्डों को 5 जोन में बांटा गया है। उन जोन में निगम में वर्तमान में कार्यरत चार उपायुक्तों को जिम्मेदारी दी गई है। उनका कार्य विभाजन भी किया गया है। एक उपायुक्त को दो जोन की जिम्मेदारी दी गई है। जोन वार व अनुभाग वार लगाया
नगर निगम आयुक्त ओमप्रकाश मेहरा के जारी आदेश के अनुसार सभी अधिकारियों व कर्मचारियों को जोन व अनुभाग वार लगाया गया है। वरिष्ठ सहायक महेन्द्र परिहार को प्रशासक के यहां लिपिक कार्य, वरिष्ठ सहायक कुलदीप चौहान को आयुक्त के यहां निजी सहायक, कनिष्ठ सहायक पृथ्वीराज सिंह शक्तावत को आयुक्त कक्ष में लिपिक कार्य, कनिष्ठ सहायक महावेर सैनी व दिनेश सुमन को अतिरिक्त आयुक्त जोन 5 के यहां लगाया है। इसी तरह से जोन एक, दो, तीन व चार में उपायुक्त के यहां लगाया है। सहायक प्रशासनिक अधिकारी अवधेश जोशी व वरिष्ठ सहायक संदीप औदिच्य समेत अन्य वरिष्ठ व कनिष्ठ सहायकों को निर्माण अनुभाग में, सहायक प्रशासनिक अधिकारी जितेन्द्र बग्गा को अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी के पद पर और पुस्तकालय अध्यक्ष के पद पर लगाया है। इन विभागों में लगाए अधिकारी कर्मचारी
पुस्तकालय अनुभाग, लेखा अनुभाग, राजस्व अनुभाग, कार्मिक अनुभाग प्रथम, कार्मिक अनुभाग द्वितीय, जन स्वास्थ्य अनुभाग, मुख्य हैल्प लाइन, गैरिज अनुभाग, विधि शाखा, नगर नियोजक अनुभाग, भवन निर्माण अनुभाग, रिकॉर्ड रूम, गौशाला अनुभाग, विद्युत अनुभाग, उद्यान अनुभाग व अतिक्रमण समेत अन्य अनुभागों में भी वरिष्ठ व कनिष्ठ सहायकों को नियुक्त कर निजी सहायक व लिपिक कार्य के लिए लगाया गया है। कई नए पदों को सृजित करने के लिए डिमांड की गई है। उनकी स्वीकृति मुख्यालय से आना शेष है।


