भास्कर न्यूज | मनेंद्रगढ़ किसानों की प्रमुख समस्याओं को लेकर केल्हारी में ब्लॉक कांग्रेस कमेटी मनेंद्रगढ़ ग्रामीण के नेतृत्व में एक दिवसीय धरना प्रदर्शन आयोजित किया गया। यह धरना महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर उनके चित्र पर माल्यार्पण और श्रद्धांजलि अर्पित कर शांतिपूर्ण ढंग से हुआ। धरना प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य धान खरीदी की समय-सीमा को आगे बढ़ाना, प्रति एकड़ 21 क्विंटल के मान से धान खरीदी सुनिश्चित करना और जिन किसानों को अब तक टोकन प्राप्त नहीं हुआ है, उन्हें तत्काल टोकन दिलवाना रहा। इसके साथ ही द्वितीय मांग के रूप में मनरेगा योजना को यथावत रखने और कमजोर करने के प्रयासों का विरोध किया गया। वक्ताओं ने कहा जिले में बड़ी संख्या में किसान अब भी धान बेचने से वंचित हैं। सीमित समय-सीमा, टोकन की कमी और खरीदी प्रक्रिया की अव्यवस्थाओं के कारण किसानों को परेशानी हो रही है। कई किसानों को अब तक टोकन नहीं मिला है। वहीं कई किसानों की उपज 21 क्विंटल प्रति एकड़ से अधिक होने के बावजूद पूरी खरीदी नहीं की जा रही है, जिससे किसान आर्थिक नुकसान झेलने को मजबूर हैं। धरना प्रदर्शन के दौरान धान खरीदी की समय-सीमा बढ़ाओ, 21 क्विंटल प्रति एकड़ खरीदी लागू करो, टोकन दो-धान लो, किसान विरोधी सरकार नहीं चलेगी और मनरेगा बचाओ जैसे नारों से धरना स्थल गूंजता रहा। कार्यक्रम में पूर्व जनपद सदस्य मकसूद आलम, किसान कांग्रेस जिला अध्यक्ष उपेंद्र द्विवेदी, मंडल अध्यक्ष संदीप द्विवेदी, आदिवासी कांग्रेस जिला अध्यक्ष अमोल सिंह, पूर्व जनपद सदस्य रफीक मेमन, सेवा दल ब्लॉक अध्यक्ष राजकुमार पूरी, अधिवक्ता जितेंद्र मिश्रा सहित कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। पूर्व जनपद पंचायत मनेंद्रगढ़ अध्यक्ष डॉ. विनय शंकर सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है, लेकिन आज किसान अपना ही धान बेचने कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार की नीतियां किसान और मजदूर विरोधी हैं। चुनाव के समय किए गए वादों को सत्ता में आते ही भुला दिया गया। कांग्रेस पार्टी किसानों के सम्मान और अधिकारों की लड़ाई लगातार लड़ती रहेगी। ब्लॉक कांग्रेस कमेटी ग्रामीण अध्यक्ष रामनरेश पटेल ने धान खरीदी की समय-सीमा बढ़ाने और किसानों का एक-एक दाना धान खरीदने की मांग रखी। साथ ही मनरेगा को महत्वपूर्ण मुद्दा बताते हुए कहा कि यह योजना ग्रामीण क्षेत्र के गरीब, मजदूर, महिलाओं और वंचित वर्ग के लिए जीवनरेखा के समान है। मनरेगा के नाम में परिवर्तन, काम के अवसरों में कमी और मजदूरी भुगतान में हो रही देरी से लाखों परिवारों की आजीविका प्रभावित हो रही है।


