प्रदेश की ANTF ने ऑपरेशन तंत्रिपाल चलाकर 25 हजार के इनामी आरोपी को गिरफ्तार किया। उसकी गिरफ्तारी पर भीलवाड़ा पुलिस ने उस पर 25000 रुपये का इनाम रखा था। आरोपी जोधपुर में डॉक्टर के पास इलाज करवाकर वापस लौट रहा था। इसी दौरान टीम ने उसे दबोच लिया।
एटीएस व एएनटीएफ महानिरीक्षक विकास कुमार ने बताया कि ANTF टीम ने आरोपी सहदेव को गिरफ्तार किया। आरोपी छद्म नाम से फरारी काट रहा था। जिस प्रकार से महाभारत में पांडवों के अज्ञातवास काल में पांडवों ने भी छदम नाम से विराट महाराज के यहाँ समय बिताया था। उस समय सहदेव का गुप्त नाम तंत्रीपाल रखा गया था। आरोपी का नाम भी सहदेव और फरारी में गुप्त नाम से काटने के कारण ऑपरेशन का कूट नाम ऑपरेशन तंत्रीपाल रखा गया था।
आरोपी के बारे में टीम ने जानकारी जुटाई तो आरोपी का दो महीने पहले बाइक एक्सीडेंट हुआ था जिसमे उसके पांवों में गंभीर चोट आयी है। इसलिए वो जोधपुर के ही किसी अस्पताल में इलाज करा रहा है। सूचना पर ANTF ने जोधपुर और आस पास के इलाकों में काफी खाक छानी पर सहदेव नामके किसी व्यक्ति के इलाज की कोई सूचना नहीं मिली। सहदेव के एक सहयोगी पर दबाव बढ़ाने पर उसने यह सूचना दी कि सहदेव महाराष्ट्र में कहीं छुपा है और डॉक्टर को दिखाने के लिए जनवरी के आखिरी सप्ताह में जोधपुर आएगा और दो-तीन दिन ठहरकर जायेगा। इसी सूचना के अनुसार ANTF ने सहदेव के सभी संपर्क सूत्रों और सहयोगियों के ठिकानों पर जाल बिछाया। आखिरकार एक रिश्तेदार के घर लंगड़ा कर पहुँचता और फिर वहां से मोटरसाइकिल से रवाना होता सहदेव CCTV कैमरा की जद में आ गया। मोटरसाइकिल के नंबर प्लेट के आधार पर पीछा कर टीम ने उसे पाली जाते हुए मोगड़ा गाँव के पास दबोचने में सफलता पायी।
पकडे जाने पर सहदेव लगातार अपनी पहचान छुपा कर अपने को सहदेव का भाई बताता रहा और फर्जी पहचान भी दिखाता रहा पर पैरों में लगी चोट के आधार पर ANTF ने उससे कड़ी पूछताछ जारी रखी। आखिर सहदेव को टूटना पडा। पूछताछ में सामने आया कि दो महीने पहले एक्सीडेंट होने के बाद सहदेव ने सोनी मेडीहब अस्पताल पावटा में अपना इलाज अपने भाई के फर्जी पहचान के दस्तावेजों के आधार पर कराया था और इसी कारण सहदेव के नाम से अस्पतालों के रिकॉर्ड खंगालती पुलिस को उसका पता ठिकाना नहीं मिल पाया था। iG विकास कुमार ने बताया पहचान छुपाने में दक्ष सहदेव की कई खेपें पुलिस के हाथ लगती रहीं, मुकदमे दर्ज भी होते रहे पर वह फर्जी पहचान के नाम पर हमेशा बच निकलने में कामयाब होता रहा। उसकी नशे की खेपें पकड़ी जातीं पर आरोपी के रूप में कोई फर्जी नाम दर्ज हो जाता और सहदेव बच निकलता। यही कारण है कि मादक पदार्थों की तस्करीन में आकंठ लिप्त सहदेव के खिलाफ गिने चुने प्रकरण ही दर्ज हो पाए। मौसेरे भाइयों को देख सीखी तस्करी आरोपी सहदेव ने 12 की पढ़ाई पूरी करने के बा हेंडीक्राफ्ट के धंधे में लग गया। अनुभव ना होने के कारण गच्चा खाकर फाइनेंस का काम शुरू किया और वहाँ भी घाटा खाया। इसके बाद जीवन यापन के लिए रेलाइन्स में मजदूरी से लेकर पिता के साथ ड्राइवरी तक सब आजमाया पर आर्थिक रूप से अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो पाया । आरोपी ने अपने दो मौसेरे भाइयों को देख तस्करी के काम में उतर पड़ा। इसके बाद स्कॉर्पियो से मादक पदार्थ राजस्थान के लिए लाया करता था। दो साल पहले भीलवाड़ा में मादक पदार्थ की खेप पकड़े जाने पर आरोपी का नाम सामने आया था। उसके बाद से ही फरार चल रहा था।


