4 साल बाद पत्नी मिली पति से:गले लगकर रोने लगी, पिता भी नहीं रोक पाया आंसू, 4 साल की बेटी ने पहली बार देखे अपने पिता

4 साल बाद पत्नी ने जब अपने पति को देखा तो, गले लगकर रोने लगी। पति जब घर से निकला था तो, उसने कहा था कि जब घर में खुशियां आएगी तब मैं भी आ जाऊंगा। 4 साल में न तो, पति आया और न घर में खुशियां आई। पिता के जाने के तीन महीने के बाद बेटी जन्म लिया। जब बेटी बड़ी हुई तो, उसने पिता के बारे में पूछा। तब मां ने पिता की फोटो दिखा दी। 4 साल बाद जब गणेश अपने घर लौट रहा था तो, उसे लखीमपुर खीरी में जहरखुरानी का शिकार बना दिया गया। जिसके बाद वह अपनी सुध-बुध खो बैठा। 2 महीने तक गणेश का लखीमपुर खीरी अस्पताल में इलाज हुआ जिसके बाद उसे भरतपुर के अपना घर आश्रम में शिफ्ट कर दिया गया। आज जब पत्नी ने अपने पत्नी को भरतपुर के अपना घर आश्रम में देखा तो, वह अपने आंसुओं को नहीं रोक पाई। पति कहा था घर में खुशियां आएंगी तब आऊंगा सुनीता कैलाली (नेपाल) ने बताया कि साल 2021 में जब गणेश घर से निकले थे तब वह गर्भवती थीं। गणेश ने निकलते हुए कहा कि जब घर में खुशियां आएंगी। तब मैं भी घर आ जाऊंगा न तो, घर में खुशियां आई और न ही गणेश आये। उनके जाने के करीब 3 महीने के बाद सुनीता ने बेटी को जन्म दिया। बेटी जब भी अपने पिता के बारे में पूछती तो, सुनीता उसे गणेश की फोटो दिखा देती। घर से निकलने के बाद गणेश ने अपने परिजनों से कभी संपर्क नहीं किया। पिता ने गणेश को जगह-जगह ढूंढा गणेश के पिता ने जगतराम थारू ने बताया कि वह उम्मीद छोड़ चुके थे कि, उनका बेटा गणेश अब उन्हें मिलेगा या नहीं, उन्होंने गणेश को नेपाल के हर जिले में ढूंढा। आखिरी में थक हार कर वह किस्मत के भरोसे बैठ गए। आज अपने बेटे को दोबारा पाकर वह काफी खुश हुए। उन्हें बुढ़ापे का सहारा मिल गया। 4 साल पहले नेपाल से आया था गणेश अपने घर आश्रम के के सचिव बसंत लाल गुप्ता ने बताया कि, गणेश 4 नेपाल से भारत के कर्नाटक में मजदूरी करने के लिए पहुंचा था। उसने वहां खाना बनाने का 4 साल काम किया। इस दौरान गणेश ने 40 हजार रुपये कमाए। जिसके बाद नवंबर महीने में गणेश अपने घर जा रहा था। इस दौरान उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में गणेश जहरखुरानी का शिकार हो गया। लखीमपुर खीरी से भरतपुर लाया गया गणेश इस घटना में गणेश अपना सुध-बुध खो बैठा। जिसके बाद गणेश को लखीमपुर खीरी के जिला अस्पताल में भर्ती करवाया गया। जहां उसका करीब 2 महीने तक इलाज चला। 12 जनवरी को लखीमपुर खीरी के अस्पताल के प्रभारी का फोन अपना घर आश्रम में आया। उन्होंने बताया कि उनके अस्पताल में 4 लोग अज्ञात भर्ती हैं वह उन्हें भरतपुर अपना घर आश्रम में भर्ती कर लें। 7 दिन पहले गणेश की हालत में हुआ सुधार 21 जनवरी को चार लोगों को अपना घर आश्रम में लाया गया। उसमें से गणेश भी एक था। गणेश का अपना घर आश्रम में भर्ती कर इलाज किया गया। जिसके बाद उसका इलाज शुरू हुआ। करीब 7 दिन पहले गणेश की हालत में सुधार हुआ और उसने अपने घर के बारे में बताया। तब भरतपुर अपना घर आश्रम की टीम ने नेपाल अपना घर आश्रम की टीम से संपर्क किया। सुनीता गणेश के गले से लगकर रोने लगी जिसके बाद गणेश के परिवार से संपर्क किया गया। तब जाकर आज गणेश का परिवार भरतपुर पहुंचा। जैसे ही सुनीता ने गणेश को देखा तो, वह गले लगकर रोने लगी। गणेश भी अपनी 4 साल की बेटी से पहली बार मिला। वहीं जगतराम थारू ने 4 साल अपने बेटे को देखा तो, उनकी भी आंखों में आंसू छलक आये।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *