मप्र के शहरों और गावों में गैस डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम विकसित करने के लिए सरकार जल्द सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नीति जारी करेगी। नीति जारी होने पर मास्टर प्लान में पीएनजी नेटवर्क और सीएनजी स्टेशन के लिए जमीन के प्रावधान शामिल करने होंगे। गैस कंपनी खुद खुदाई करेगी, उसे खुद ही सड़कें रिपेयर करके देनी होंगी। एक समय में 5 किमी से अधिक क्षेत्र में खुदाई करके काम नहीं कर सकते। कंपनियां युवाओं को 6 महीने की ट्रेनिंग देकर काम पर रखेंगी। गैस नेटवर्क प्रोजेक्ट के लिए कलेक्टर द्वारा बने लैंड पूल से या नगरीय निकायों की जमीन ली जा सकेगी। गैस कंपनियां राज्य की किसी एजेंसी के साथ मिलकर प्रोजेक्ट को अनुमति देने का सिंगल विंडो पोर्टल विकसित करेंगी। कलेक्टर इसकी अनुमति दे सकेंगे। ऑप्टिकल फाइबर, पानी और सीवेज लाइन की तर्ज पर इन्हेँ अनुमति दी जाएगी। आवेदन करने वाले को सभी एनओसी लेनी होंगी। मास्टर प्लान में पीएनजी नेटवर्क और सीएनजी स्टेशनों के लिए जमीन का प्रावधान निकायों को करना होगा। बिल्डिंग प्लान में पीएनजी लाइन के प्रावधान शामिल करने होंगे। सभी सरकारी दफ्तरों, आवासों, गेस्ट हाउस में पीएनजी की व्यवस्था करनी होगी। सड़कें रिपेयर के बाद भी जमा रहेगी 10% राशि
सभी गैस कंपनियों को जिन सड़कों की खुदाई की, उन्हें खुद रिपेयर करके देना होगा। जब निकाय रिपेयर को संतोषजनक मानेंगे तो ही गारंटी की 90 % राशि वापस करेंगे। 10 % राशि आगे एक साल रखरखाव के लिए जमा रहेगी। एक बार में 5 किमी खुदाई करके ही काम होगा, इसको भरने पर ही आगे खुदाई कर सकेंगे। जो एजेंसी गैस पाइपलाइन को क्षतिग्रस्त करेगी, उसको ही नुकसान भरना होगा। खुदाई करने से पहले एमपीएसईडीसी के पोर्टल पर जाकर अन्य एजेंसियों को सूचित करना होगा। जहां पहले से गैस पाइपलाइन है, वहां नई अनुमति नहीं लेनी होगी। नीति की मुख्य बातें


